बिहार सरकार युवाओं के लिए खोलेगी ग्लोबल करियर का रास्ता, अंग्रेज़ी के साथ जर्मन-कोरियन-अरबी-जापानी सीखकर दुनिया जीतने की तैयारी, नौजवानों को बिना पैसे के मिलेगा प्रशिक्षण
Bihar News: कौशल विकास मिशन के तहत बिहार के नौजवानों को ऐसी सौग़ात दी जा रही है, जो उन्हें सिर्फ़ रोज़गार नहीं बल्कि ग्लोबल पहचान दिला सकती है।
Bihar News: बिहार की सियासत में अक्सर पलायन, बेरोज़गारी और मौक़ों की कमी का मातम रोया जाता रहा है, लेकिन अब तस्वीर बदलती नज़र आ रही है। कौशल विकास मिशन के तहत बिहार के नौजवानों को ऐसी सौग़ात दी जा रही है, जो उन्हें सिर्फ़ रोज़गार नहीं बल्कि ग्लोबल पहचान दिला सकती है। अब युवा अंग्रेज़ी के साथ-साथ जर्मन, कोरियन, अरबी और जापानी जैसी विदेशी भाषाएं भी बिल्कुल मुफ़्त में सीख रहे हैं। यह पहल राज्य के छात्र-छात्राओं के लिए अंतरराष्ट्रीय रोज़गार के दरवाज़े खोलने की दिशा में एक बड़ा क़दम मानी जा रही है।
श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि कौशल विकास मिशन के तहत शुरू किया गया यह विदेशी भाषा प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क है। इसका मक़सद यह है कि बिहार का हर नौजवान, चाहे वह किसी भी तबक़े से आता हो, दुनिया की प्रमुख भाषाओं को समझ सके और वैश्विक मंच पर अपनी काबिलियत साबित कर सके। सियासी गलियारों में इसे “लोकल टैलेंट, ग्लोबल प्लेटफॉर्म” की सोच के तौर पर देखा जा रहा है।
दीपक आनंद के मुताबिक, विदेशी भाषा प्रशिक्षण से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनके कौशल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब बिहार के नौजवान सिर्फ़ डिग्रियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विदेशी संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में भी अपनी जगह बना सकेंगे। यह प्रशिक्षण उन्हें दुनिया के बदलते रोज़गार बाज़ार के मुताबिक तैयार करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि कौशल विकास मिशन ने न सिर्फ़ बिहार बल्कि देश के अन्य राज्यों के युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। आज बिहार के नौजवान कक्षाओं से निकलकर दफ्तरों, प्रयोगशालाओं और ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। विदेशी भाषा प्रशिक्षण इस सफ़र को और मज़बूती देगा।
सियासी नजरिये से देखें तो यह पहल उस आरोप का जवाब भी है, जिसमें बिहार को केवल श्रमिक राज्य के रूप में देखा जाता रहा है। अब यहां के युवा सिर्फ़ मज़दूरी नहीं, बल्कि ज्ञान और भाषा के दम पर दुनिया से मुकाबला करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इस योजना से न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बिहार के युवाओं के लिए रोज़गार के नए क्षितिज खुलेंगे और राज्य के मानव संसाधन को एक नई, मज़बूत पहचान मिलेगी।