बिहार में हाईवे से अवैध अतिक्रमण हटाने को 60 दिन की डेडलाइन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार का बड़ा एक्शन

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद बिहार सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। परिवहन विभाग ने सभी जिलों के DM और SP को नेशनल हाईवे से अवैध अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने के लिए 60 दिनों की डेडलाइन दी है।

पटना: बिहार में सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने और राष्ट्रीय राजमार्गों को हादसों से मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद बिहार परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने सूबे के सभी जिलाधिकारियों (DM) को पत्र जारी कर शीर्ष अदालत के आदेशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट में चल रहे फलोदी एक्सीडेंट मामले (WP Civil No.-9 of 2025) में दिए गए निर्देशों के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना और यातायात को सुगम बनाना है।


टास्क फोर्स का गठन और अतिक्रमण हटाने की 60 दिनों की डेडलाइन

अदालत के आदेश को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने बेहद सख्त समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है। जिन जिलों से भी नेशनल हाईवे गुजरते हैं, वहां के जिलाधिकारियों को 15 दिनों के भीतर "डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स" का गठन करना होगा। इसके साथ ही, हाईवे सेफ्टी जोन में जितने भी नए या पुराने अवैध निर्माण और अतिक्रमण हैं, उन्हें हटाने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा दी गई है। इसी अवधि के भीतर डीएम को नियमित जांच और हाईवे पेट्रोलिंग के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी तैयार करना होगा, ताकि नियमों का उल्लंघन न हो सके।


अवैध एनओसी की समीक्षा और भोजपुर में ट्रक मालिकों के साथ बैठक

सड़क सुरक्षा को लेकर केवल अतिक्रमण ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों पर भी नकेल कसी जा रही है। हाईवे जोन में बिना NHAI या PWD की मंजूरी (क्लियरेन्स) के जारी किए गए सभी लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और ट्रेड अप्रूवल की 30 दिनों के भीतर समीक्षा की जाएगी। इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है; इसी कड़ी में भोजपुर के डीएम और एसपी ने ट्रक एसोसिएशन के साथ एक संयुक्त बैठक की। बैठक में अधिकारियों ने अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, तो वहीं ट्रक मालिकों ने रास्ते में होने वाली अवैध वसूली पर रोक लगाने की मांग की।


जवाबदेही तय, मुख्य सचिव की बैठक पर टिकी नजरें

सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गों पर अवैध पार्किंग, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार और ट्रक ले-बाय जैसी सुविधाओं को लेकर जो विस्तृत निर्देश दिए हैं, उन्हें लागू करने की संयुक्त जिम्मेदारी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सौंपी गई है। टास्क फोर्स को हर 15 दिन में बैठक कर इसकी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्य सचिव ने भी उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 60 दिनों की डेडलाइन के भीतर नेशनल हाईवे को अतिक्रमण मुक्त कराकर आम जनता को कितनी राहत दिला पाता है।

धीरज पराशर की रिपोर्ट