Bihar Land Records: अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगा भूमि सर्वेक्षण, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि सर्वेक्षण और दस्तावेजों की जांच के लिए 5 सदस्यीय AI समिति का गठन किया है। जानें कैसे बदलेगी व्यवस्था।
Patna : बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अपनी सेवाओं को हाई-टेक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विभाग के दैनिक कार्यों, भू-अभिलेखों के प्रबंधन और भूमि सर्वेक्षण जैसे जटिल कामों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जाएगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन और अध्ययन के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय पाँच सदस्यीय 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिति' का गठन किया है। विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा 8 अप्रैल, 2026 को इस आशय का कार्यालय आदेश जारी किया गया है।
सचिव जय सिंह करेंगे समिति की अध्यक्षता
इस नवगठित समिति की कमान विभाग के सचिव श्री जय सिंह को सौंपी गई है, जो समिति के अध्यक्ष होंगे। उनके अलावा समिति में विभाग के अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज, बिहार सर्वेक्षण कार्यालय की उप निदेशक श्रीमती मोना झा, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री नवाजिश अख्तर और आई.टी. मैनेजर श्री आनंद शंकर को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। यह टीम विभाग में अत्याधुनिक तकनीक के समावेश के लिए उत्तरदायी होगी।
भूमि सर्वेक्षण और खतियान की जांच होगी ऑटोमेटेड
समिति का मुख्य दायित्व उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहाँ AI का उपयोग कर काम को आसान बनाया जा सके। इसमें विशेष रूप से भूमि सर्वेक्षण, खतियान और पुराने दस्तावेजों की ऑटोमेटेड जाँच तथा डेटा विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे दस्तावेजों की हेराफेरी पर लगाम लगेगी और डेटा की शुद्धता बढ़ेगी। समिति इसके लिए एक विस्तृत रोडमैप और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेगी ताकि तकनीकी समाधानों को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।
कर्मचारियों को मिलेगी नई तकनीक की ट्रेनिंग
विभाग ने केवल तकनीक को अपनाने तक ही सीमित रहने का लक्ष्य नहीं रखा है, बल्कि 'क्षमता संवर्धन' पर भी जोर दिया है। समिति विभागीय अधिकारियों और कर्मियों को इस नई तकनीक के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने की रणनीति तय करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी भी AI टूल्स का उपयोग सहजता से कर सकें, जिससे नागरिक सेवाओं के वितरण में तेजी आए।
तकनीकी विशेषज्ञों की भी ली जाएगी मदद
यह समिति पूरी तरह से स्वतंत्र होकर काम करेगी और जरूरत पड़ने पर बाहर के तकनीकी विशेषज्ञों को भी विचार-विमर्श के लिए आमंत्रित कर सकेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि भूमि सुधार जैसे चुनौतीपूर्ण विभाग में AI का प्रवेश न केवल पारदर्शिता लाएगा, बल्कि जमीन से जुड़े विवादों को कम करने में भी यह तकनीक मील का पत्थर साबित हो सकती है।