बिहार के अस्पतालों में अब 'डिजिटल' होगा इलाज: मरीजों की ABHA ID अनिवार्य, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया कड़ा फरमान

बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अब मरीजों का 'डिजिटल कुंडली' (ABHA ID) होना अनिवार्य कर दिया गया है।

Patna - बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के चिकित्सा ढांचे को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। संयुक्त सचिव दिनेश कुमार झा द्वारा जारी आदेश (पत्रांक 334(1), दिनांक 20.03.2026) के अनुसार, अब राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में आने वाले मरीजों का डिजिटल स्वास्थ्य अभिलेख (Digital Health Records) तैयार करना अनिवार्य होगा । यह फैसला राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC), नई दिल्ली द्वारा जारी न्यूनतम मानक आवश्यकताओं के आलोक में लिया गया है । विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में मेडिकल कॉलेजों के वार्षिक नवीनीकरण (Annual Renewal) और मूल्यांकन की प्रक्रिया इसी डिजिटल डेटा के आधार पर पारदर्शी बनाई जाएगी 

ओपीडी से इमरजेंसी तक ABHA ID का पहरा 

नए नियमों के तहत अस्पतालों की ओ०पी०डी० (OPD), आई०पी०डी० (IPD) और आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) में इलाज के लिए आने वाले हर मरीज का जुड़ाव 'आभा आईडी' (ABHA ID) से होना आवश्यक है । NMC का मानना है कि इससे अस्पतालों में मरीजों के वास्तविक भार (Clinical Workload) का वस्तुनिष्ठ सत्यापन किया जा सकेगा, जिससे कागजी आंकड़ों की हेराफेरी पर लगाम लगेगी । यह आदेश इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) और इंदिरा गाँधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) समेत बिहार के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा 

पंजीकरण की प्रक्रिया हुई बेहद आसान 

मरीजों को होने वाली असुविधा को देखते हुए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने ABHA ID पंजीकरण की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया है । अब अस्पताल में मरीज के आधार कार्ड के जरिए ओटीपी (OTP) या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से तुरंत आईडी बनाई जा सकती है । यदि मरीज ने पहले ही मोबाइल नंबर से अपनी आईडी बना रखी है, तो अस्पताल सिर्फ मोबाइल नंबर और ओटीपी के जरिए उसका रिकॉर्ड प्राप्त कर सकता है । इसके अलावा, स्मार्टफोन धारक मरीज क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके भी अपनी जानकारी डिजिटल रूप से साझा कर सकेंगे 

कॉलेजों की मान्यता पर लटकी तलवार 

स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती के पीछे मुख्य कारण मेडिकल कॉलेजों का वार्षिक मूल्यांकन है। NMC ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि कॉलेजों के वार्षिक असेसमेंट को उद्देश्यपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा । यदि अस्पताल मरीजों के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से एकीकृत करने में विफल रहते हैं, तो उनके वार्षिक रिन्यूअल (Renewal) की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है । विभाग ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य और अधीक्षकों को कड़ाई से इन निर्देशों का पालन कराने का निर्देश दिया है 

डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति की ओर बिहार 

इस पहल का उद्देश्य न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता लाना है, बल्कि मरीजों के लिए भी इलाज को सुलभ बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से मरीजों को अपनी पुरानी जांच रिपोर्ट और पर्चे साथ लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी । आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत तैयार यह इकोसिस्टम मरीजों के डेटा को सुरक्षित रखेगा और राज्य भर में कहीं भी डॉक्टरों को मरीज की मेडिकल हिस्ट्री देखने में मदद करेगा । स्वास्थ्य विभाग के आईटी मैनेजर को यह आदेश विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है ताकि सभी संबंधित संस्थान इसे गंभीरता से लें