राजस्व वसूली में 'जीरो' रहे अफसरों पर गिरी गाज: खान विभाग ने 23 जिलों के माइनिंग अफसरों को थमाया नोटिस, 7 पर चार्जशीट की तैयारी

बिहार के खान एवं भू-तत्व विभाग ने राजस्व संग्रह में भारी गिरावट और असंतोषजनक प्रदर्शन को देखते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने समीक्षा बैठक के बाद 23 जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों (MDO) से स्पष्टीकरण मांगा है

Patna   :   बिहार के खान एवं भू-तत्व विभाग ने राजस्व संग्रह में भारी गिरावट और असंतोषजनक प्रदर्शन को देखते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने समीक्षा बैठक के बाद 23 जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों (MDO) से स्पष्टीकरण मांगा है और कई के खिलाफ गंभीर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं。

अधिकारियों की लापरवाही पर विभागीय गाज

मंगलवार को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में जिलावार राजस्व संग्रहण की बारीकी से जांच की गई。 बैठक में पाया गया कि 23 जिलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है, जिसके बाद संबंधित पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया。 सबसे कड़ी कार्रवाई रोहतास, पटना, औरंगाबाद, लखीसराय, जमुई, वैशाली और पूर्णिया के एमडीओ पर हुई है, जिनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु प्रपत्र 'क' गठित करने का आदेश दिया गया है。

शून्य राजस्व वाले जिलों को अल्टीमेटम

निदेशक ने मधुबनी और गोपालगंज जैसे जिलों की स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की, जहाँ एक सप्ताह की अवधि में राजस्व संग्रह शून्य पाया गया。 इन जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों और संबंधित खान निरीक्षकों को अनिवार्य रूप से स्पष्टीकरण देने को कहा गया है。 विभाग ने साफ कर दिया है कि लक्ष्य प्राप्ति में विफलता और लापरवाही की स्थिति में उत्तरदायित्व तय कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी。

बालू घाटों की नीलामी और जब्त वाहनों पर जोर

बैठक के दौरान राजस्व क्षति की भरपाई के लिए अनियमित बालू घाटों की शीघ्र नीलामी का निर्देश दिया गया。 जनवरी माह के अंत तक सभी सरेंडर किए गए बालू घाटों की बंदोबस्ती पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है。 इसके साथ ही, विभाग ने जब्त किए गए वाहनों के अधिहरण और जब्त बालू व पत्थर की नियमानुसार त्वरित नीलामी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है。

लाइसेंस और कानूनी मामलों का निष्पादन 

खनिज विकास से जुड़े लाइसेंसों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्राप्त सभी आवेदनों का 16 जनवरी तक निपटारा करने का समय तय किया गया है。 इसके अलावा, न्यायालयों में लंबित वादों के संबंध में समयबद्ध और विधिसम्मत प्रतिवेदन (Affidavit) दायर करने पर बल दिया गया है ताकि कानूनी अड़चनों के कारण राजस्व का नुकसान न हो。 बैठक में विभाग के वरीय पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी जिलों के एमडीओ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे