पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे: सीएम नीतीश कुमार ने किया निर्माण कार्य का निरीक्षण, अब सिर्फ 3 घंटे में तय होगा सफर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे के प्रथम खंड का निरीक्षण कर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के पूरा होने से पटना से चंपारण की दूरी महज 3 घंटे की रह जाएगी।
Patna - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को सारण जिले के बकरपुर-मानिकपुर सड़क मार्ग पर रुककर निर्माणाधीन पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे के प्रथम खंड का गहन निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद इंजीनियरों और अधिकारियों से प्रोजेक्ट की बारीकियों को समझा और कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे समय सीमा के भीतर पूर्ण करने का कड़ा निर्देश दिया।
2027 तक प्रथम खंड पूरा करने का लक्ष्य
निरीक्षण के दौरान पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि इस 'ग्रीनफील्ड परियोजना' पर काम युद्धस्तर पर जारी है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के पहले खंड का निर्माण कार्य अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग की कोशिश है कि तय समय से पहले ही मुख्य संरचनाओं का ढांचा तैयार कर लिया जाए।
पटना से बेतिया: 3 घंटे में सुहाना सफर
इस एक्सप्रेस-वे के पूरा होने के बाद उत्तर बिहार और राजधानी पटना के बीच की दूरी सिमट जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में पटना से बेतिया जाने में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी और लोग मात्र 3 घंटों में बेतिया पहुंच सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पुराने और व्यस्त मार्गों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा।
चार जिलों की बदलेगी तस्वीर, आर्थिक विकास को मिलेगी रफ्तार
मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को बिहार की 'लाइफलाइन' बताते हुए कहा कि यह सड़क वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों को सीधे पटना से जोड़ेगी। इस सीधी कनेक्टिविटी से उत्तर बिहार के जिलों में व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक विकास में अभूतपूर्व तेजी आएगी। किसानों को अपनी उपज राजधानी तक पहुंचाने में आसानी होगी।
निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे आला अधिकारी
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के साथ उनके प्रधान सचिव दीपक कुमार, पथ निर्माण सचिव पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, ओएसडी डॉ. गोपाल सिंह और सारण के एसएसपी विनीत कुमार समेत NHAI के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि निर्माण में आने वाली किसी भी भूमि संबंधी बाधा को तुरंत दूर किया जाए।