Bihar Bureaucracy: अब टालमटोल नहीं चलेगी, जनप्रतिनिधियों के फोन पर अफसरों को करना होगा कॉल बैक,अधिकारियों को पालन करने होंगे ये 4 मुख्य नियम
Bihar Bureaucracy: अक्सर यह शिकायत सामने आती थी कि प्रशासनिक अधिकारी आम जनता के मुद्दों से जुड़े जन प्रतिनिधियों के पत्रों और फोन कॉल्स को नजरअंदाज कर देते थे।
Bihar Bureaucracy: बिहार के हुक्मरानों और बाबुओं की सुस्ती पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अब सूबे के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी जन प्रतिनिधियों के फोन कॉल्स और पत्रों को ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकेंगे। विधायकों और सांसदों की लगातार हो रही उपेक्षा से खफा राज्य सरकार ने ब्यूरोक्रेसी की इस बेलगाम मनमानी पर शिकंजा कसने के लिए एक नया और सख्त फरमान जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के इस आदेश के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान को बरकरार रखने के लिए सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि किसी अफसर से किसी माननीय (विधायक या सांसद) का फोन मिस हो जाता है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से तुरंत ‘कॉल बैक’ करना होगा। सरकार का स्पष्ट मानना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि ही जनता और शासन के बीच की सबसे मुख्य और मजबूत कड़ी हैं, इसलिए इनकी अनदेखी अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार का यह कड़ा आदेश राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, विभागाध्यक्षों, डीजीपी, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलों के तमाम डीएम-एसपी तक को भेज दिया गया है। नए नियमों के दायरे में पत्रों की अनदेखी को भी पूरी तरह शामिल किया गया है।
कॉल मिस होने पर खुद कॉल बैक: यदि व्यस्तता के कारण फोन उठाना मुमकिन न हो, तो फुर्सत मिलते ही अफसरों को खुद यथाशीघ्र फोन वापस मिलाना होगा।
पत्रों की त्वरित रसीद: विधायकों और सांसदों से प्राप्त होने वाले हर पत्र की तुरंत प्राप्ति रसीद देनी होगी।
लिखित स्टेटस रिपोर्ट: पत्र पर किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई या मामला कहां लंबित है, इसकी पूरी रिपोर्ट एक तय समय-सीमा के भीतर संबंधित जनप्रतिनिधि को लिखित में देनी होगी।
गरिमा के अनुरूप शिष्टाचार: कार्यालय में जनप्रतिनिधियों के आगमन पर उनके पद एवं गरिमा के अनुरूप पूरा शिष्टाचार और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना होगा।
अक्सर यह शिकायत सामने आती थी कि प्रशासनिक अधिकारी आम जनता के मुद्दों से जुड़े जन प्रतिनिधियों के पत्रों और फोन कॉल्स को नजरअंदाज कर देते थे। इस नए आदेश का मुख्य मकसद इसी दूरी को पाटना और जवाबदेही तय करना है। नियमों की अनदेखी या लापरवाही बरतने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अब सीधे तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गाज गिरेगी।