बिहार पुलिस में बड़े पैमाने पर IPS तबादलों की सुगबुगाहट,फिर से लागू होगी जोनल-रेंज व्यवस्था,कई जिलों के SP बदले जाएंगे!

प्रभारी DGP प्रीता वर्मा के कमान संभालते ही बिहार पुलिस महकमे में कई IPS अधिकारियों के तबादले की सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानिए कौन से जिलों के SP बदल सकते है और EOU DIG के सख्त रुख पर क्यों मची है खलबली!।

बिहार पुलिस में बड़े पैमाने पर IPS तबादलों की सुगबुगाहट- फोटो : Reporter

बिहार के डीजीपी विनय कुमार के अचानक अवकाश पर जाने के बाद 1991 बैच की ही IPS अधिकारी प्रीता वर्मा को राज्य के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। प्रभारी डीजीपी प्रीता वर्मा के पदभार संभालते ही बिहार पुलिस मुख्यालय (पटेल भवन) से लेकर सत्ता के गलियारों तक प्रशासनिक फेरबदल की जोरदार चर्चा शुरू हो गई है। पटेल भवन के कॉरिडोर के बंद कमरों से लेकर राज्य के प्रशासनिक हलकों में आने वाले दिनों में होने वाले तबादलों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि संभवतः अगले सप्ताह लगभग दो दर्जन आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की जा सकती है, जिसमें मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जिलों के पुलिस कप्तान तक शामिल होंगे।


दर्जन भर जिलों से लेकर मुख्यालय तक बड़े फेरबदल के आसार

सत्ता के गलियारों और पुलिस मुख्यालय के विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि अगले सप्ताह राज्य में बड़े पैमाने पर IPS अधिकारियों का स्थानांतरण किया जा सकता है। इस संभावित फेरबदल की जद में लगभग दो दर्जन IPS अधिकारी आ सकते हैं। इसमें पुलिस मुख्यालय में उच्च पदों पर तैनात अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न इकाइयों में कार्यरत आईजी (IG), डीआईजी (DIG) और कई जिलों के पुलिस कप्तान (SP) शामिल हैं, जिनकी नई तैनाती पर अंतिम निर्णय लिया जा रहा है। इन तबादलों में कई जिला कप्तानो को एक्टिव पुलिसिग से किनारे हटाने कि भी संभावना है।


कई जिलों के एसपी पर गाज संभव, नए जोनल सिस्टम पर मंथन

जिला स्तर पर तैनात अधिकारियों की बात करें तो मधेपुरा, खगड़िया, नवादा और सुपौल जिलों के पुलिस कप्तानों के तबादले की चर्चा सबसे जोर-शोर से चल रही है। इसके अलावा दो जिलों के एसपी अपनी मौजूदा तैनाती से असंतुष्ट हैं और लगातार असहमति जता रहे हैं, जिसके कारण उन्हें भी बदले जाने की प्रबल संभावना है। साथ ही, बिहार पुलिस में जोनल और रेंज व्यवस्था को दोबारा प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए किस आईजी या डीआईजी को कहां की जिम्मेदारी सौंपी जाए, इस पर भी शीर्ष स्तर पर गंभीर मंथन जारी है।


EOU के डीआईजी की सख्त कार्यशैली और बालू घोटाले का पेंच

इन तमाम तबादलों की चर्चाओं के बीच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में तैनात एक बड़े अधिकारी का मामला विशेष रूप से सुर्खियों में है। EOU में पदस्थ डीआईजी की निष्पक्ष और सख्त कार्यशैली कई रसूखदार अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बालू घोटाले में संलिप्त दो डीएसपी और एक एसडीएम की जांच फाइल पर उक्त डीआईजी के कड़े रुख के कारण मामला अटका हुआ है, जिससे आरोपियों को क्लीन चिट नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि EOU के इस अधिकारी के संभावित तबादले की वजहों को लेकर दबे स्वर में जोरदार चर्चा हो रही है।