बिहार पुलिस का बड़ा फैसला: पांच जिलों में सृजित हुए ग्रामीण एसपी के पद, चार महीनों में अपराधियों को फांसी और साइबर फ्रॉड पर कड़ा प्रहार
Bihar News : एडीजी मुख्यालय, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर और साइबर सेल आईजी ने पुलिस महकमे की बड़ी उपलब्धियां मीडिया के साथ साझा की। बिहार पुलिस ने बड़ा फैसला लेते हुए पांच जिलों में ग्रामीण एसपी के पद सृजित किए है...
Patna : बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा राज्य की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मीडिया से साझा की गईं। इस दौरान एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने बताया कि बिहार के पांच बड़े जिलों—पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 'ग्रामीण पुलिस अधीक्षक' (रूरल एसपी) के नए पदों का सृजन किया गया है। इन जिलों के मूल एसपी नए ग्रामीण एसपी के साथ कार्यों का बंटवारा करेंगे, और ग्रामीण एसपी स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकेंगे। उनके अधीन पुलिस निरीक्षक, पुलिस अवर निरीक्षक, सिपाही और हवलदार मुस्तैदी से कार्य करेंगे। एडीजी मुख्यालय ने इसे पुलिसिंग को बेहतर बनाने की दिशा में एक बेहतरीन पहल बताया है।
चार महीने में 2 अपराधी को फांसी और 400 से अधिक को उम्र कैद की सजा
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर (विधि-व्यवस्था) सुधांशु रंजन ने पिछले चार महीनों में पुलिस कार्रवाई की बड़ी उपलब्धियों का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि त्वरित अदालती कार्रवाई और ठोस पैरवी के चलते चार महीनों में दो खूंखार अपराधियों को फांसी की सजा और 400 से अधिक अपराधियों को उम्रकैद की सजा दिलाई गई है। फांसी की सजा पाने वाले अपराधियों में पहला मामला बेगूसराय जिले का है, जहां एक सनकी अपराधी ने एक व्यक्ति के माता-पिता और बहन की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। दूसरा मामला मेहंदिया थाने से जुड़ा है, जहां एक कसाई प्रवृत्ति के अभियुक्त ने अपनी ही पत्नी की हत्या कर उसके शव को कई टुकड़ों में काट डाला था। पुलिस की त्वरित जांच के कारण इन दोनों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया गया।
साइबर अपराधियों पर कसी जा रही नकेल
साइबर अपराध की चुनौतियों पर बात करते हुए बिहार साइबर सेल के आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने जनता से बेहद सावधान रहने की अपील की। उन्होंने पिछले चार महीनों का आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि साइबर सेल के पास आने वाली रोजाना कॉल्स की संख्या 5500 से बढ़कर अब 8100 के पार पहुंच गई है, जिसमें हर दिन लगभग 430 लिखित शिकायतें दर्ज हो रही हैं। साइबर अपराधियों से निपटने के लिए बिहार पुलिस 'साइबर प्रहार 3.0' विशेष अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फर्जी (फेक) बैंक खातों पर विशेष चौकसी बरती जा रही है, जिसके तहत अब तक 5000 से अधिक संदिग्ध खातों को फ्रीज किया जा चुका है।
आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने वित्तीय धोखाधड़ी के आंकड़ों का खुलासा करते हुए बताया कि राज्य में अब तक साइबर फ्रॉड के माध्यम से कुल 199.09 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायतें मिली हैं। बिहार पुलिस की मुस्तैदी के कारण इनमें से 7.6 करोड़ रुपये सफलतापूर्वक रिकवर (वापस) करा लिए गए हैं। इस बड़ी सफलता के साथ ही ठगी की गई रकम की आर्थिक रिकवरी करने के मामले में बिहार पूरे देश में चौथे स्थान पर आ गया है, जो राज्य पुलिस की तकनीकी और जांच क्षमता को दर्शाता है।
माननीयों की सुरक्षा कम किए जाना तकनीकी प्रक्रिया : एडीजी
एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने थानों की कार्यप्रणाली और वीआईपी सुरक्षा पर भी पुलिस का रुख साफ किया। उन्होंने थानों में खुले 'महिला व आमजन हेल्प डेस्क' की कार्यशीलता पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय थानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हेल्प डेस्क पूरी तरह सक्रिय रहकर लोगों की शिकायतों को तुरंत दूर करें। वहीं, बिहार में माननीयों (नेताओं और जनप्रतिधियों) की सुरक्षा कम किए जाने के सवाल पर एडीजी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा की समीक्षा और उसे कम करने का फैसला एक उच्च स्तरीय और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता; पुलिस विभाग प्राप्त निर्देशों के अनुरूप पूरी जिम्मेदारी से काम कर रहा है।
अनिल की रिपोर्ट