Bihar Tender Scam: बिहार में 7,482 करोड़ के टेंडर का महाखेल! 265 करोड़ की कमीशनखोरी का ED ने खोला राज, इन IAS पर गंभीर आरोप

Bihar Tender Scam: बिहार में सरकारी परियोजनाओं के टेंडर आवंटन को लेकर कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है।...

सरकारी खजाने पर सिंडिकेट का डाका!- फोटो : X

Bihar Tender Scam: बिहार में सरकारी परियोजनाओं के टेंडर आवंटन को लेकर कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। नगर विकास विभाग, बुडको और नमामि गंगे की 35 परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये के टेंडर आवंटित करने और उसके बदले संगठित तरीके से कमीशन वसूले जाने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय  की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में इस कथित खेल की परतें खोली गई हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, ठेकेदार रिशुश्री से जुड़े सिंडिकेट को कुल 7,482.37 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटित किए गए थे। इनमें से 4,114.26 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित सिंडिकेट वर्ष 2017 से 2025 के बीच सक्रिय रहा। इस दौरान सरकारी परियोजनाओं के टेंडर हासिल करने से लेकर रनिंग बिल पास कराने तक कमीशन का नेटवर्क काम कर रहा था। मामला सामने आने के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

5 से 7 फीसदी कमीशन का कथित खेल, 265 करोड़ की अपराध की कमाई

प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट को बताया कि बड़े ठेके हासिल करने और भुगतान संबंधी बिल पास कराने के लिए 5 से 7 फीसदी तक कमीशन वसूला जाता था। एजेंसी ने न्यूनतम 5 फीसदी कमीशन के आधार पर 265.73 करोड़ रुपये की कथित अपराध की कमाई का आकलन किया है।हलफनामे के मुताबिक, रिशुश्री बड़ी कंपनियों को सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर कंसल्टेंसी और सब-कॉन्ट्रैक्ट की आड़ में 5 से 7 फीसदी तक लाइजनिंग फीस वसूलता था। आरोप है कि इसमें से 2 से 3.5 फीसदी हिस्सा संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों को बिल पास कराने के एवज में रिश्वत के रूप में दिया जाता था।जांच एजेंसी को जब्त टैली डेटा और एक्सेल शीट से कथित तौर पर फर्जी खर्च और बढ़ा-चढ़ाकर बिल तैयार किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। इनका इस्तेमाल अवैध कमीशन की रकम को वैध दिखाने के लिए किए जाने का आरोप है।

35 परियोजनाओं में 7,482 करोड़ के टेंडर, जानिए कहां कितना हुआ भुगतान

प्रवर्तन निदेशालय  के हलफनामे में तीन प्रमुख क्षेत्रों की 35 परियोजनाओं का ब्योरा दिया गया है। इसके मुताबिक:

परियोजना/विभाग                                                  टेंडर राशि

नगर विकास विभाग और बुडको                             ₹5,268.01 करोड़

स्मार्ट सिटी परियोजनाएं                                         ₹1,202.37 करोड़

नमामि गंगे परियोजनाएं                                        ₹1,011.98 करोड़

कुल                                                                    ₹7,482.37 करोड़

जून 2025 तक इन परियोजनाओं में कुल 4,114.26 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। इसमें नगर विकास विभाग और बुडको के हिस्से से 2,861.48 करोड़, स्मार्ट सिटी से 875.52 करोड़ और नमामि गंगे परियोजनाओं से 377.25 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है।

सिंडिकेट से जुड़ी कंपनियों को मिले करोड़ों रुपये

जांच एजेंसी के हलफनामे में कई कंपनियों को जारी रकम का भी उल्लेख किया गया है। इसमें तोशिया वाटर सॉल्यूशंस को 1,299.37 करोड़, वीए टेक वाबाग को 1,037.95 करोड़, केवडिया कंस्ट्रक्शंस को 510.56 करोड़ और भुगन इंफाकॉन को 316.03 करोड़ रुपये मिलने की बात कही गई है। वहीं, श्री नेस्टबिल्ड इन्फ्रा को 287.46 करोड़ और साई आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन को 83.63 करोड़ रुपये जारी किए गए।

प्रवर्तन निदेशालय  की जांच में कई अधिकारियों से पूछताछ

इस पूरे मामले में सरकारी विभागों के शीर्ष पदों पर तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हलफनामे के मुताबिक, अभिलाष कुमार शर्मा, सुनील कुमार यादव, धर्मेंद्र कुमार और संतोष कुमार मल्ल के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, आनंद किशोर और योगेश कुमार सागर ने पेशी के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। संतोष कुमार मल्ल से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। उनसे कथित तौर पर टेंडर से जुड़े दस्तावेजों, चैट और अन्य लेनदेन के संबंध में सवाल किए गए।

802 करोड़ के ठेके रद्द, फिर भी कंपनी को मिले 183 करोड़

इस मामले में नालों की सफाई और बायो-रेमेडिएशन परियोजनाएं भी जांच के घेरे में हैं। रिशुश्री से जुड़ी श्री नेस्टबिल्ड इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में राज्य के 507 नालों के बायो-रेमेडिएशन के लिए 802.10 करोड़ रुपये के दो बड़े ठेके दिए गए थे।

केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद बिहार सरकार ने 4 जुलाई 2025 को दोनों अनुबंध रद्द कर दिए। लेकिन तब तक कंपनी 183.76 करोड़ रुपये का सरकारी भुगतान प्राप्त कर चुकी थी।फिलहाल इस पूरे मामले में ED की जांच जारी है। अब निगाहें एजेंसी की अगली रिपोर्ट और हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि सरकारी खजाने से निकली हजारों करोड़ की रकम के कथित कमीशन नेटवर्क में शामिल लोगों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी?