Bihar News: बिहार में फिजूलखर्ची पर सरकार ने कसा शिकंजा, अब ये योजनाएं होंगी बंद
Bihar News: कम आमदनी और बढ़ते खर्च के बीच बिहार सरकार ने अब सरकारी खजाने पर बोझ डालने वाली योजनाओं और गैरजरूरी खर्चों पर लगाम कसने का फैसला किया है।...
Bihar News: कम आमदनी और बढ़ते खर्च के बीच बिहार सरकार ने अब सरकारी खजाने पर बोझ डालने वाली योजनाओं और गैरजरूरी खर्चों पर लगाम कसने का फैसला किया है। वित्तीय दबाव के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन पुरानी योजनाओं का मकसद पूरा नहीं हो रहा या जो अब उपयोगी नहीं रह गई हैं, उन्हें पूरी तरह बंद किया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसी योजनाओं के लिए विभागों की ओर से बजट की मांग करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
सरकार की इस कवायद का मकसद सरकारी धन का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करना और राजकोषीय स्थिति को मजबूत करना है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को वित्तीय अनुशासन का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। ऐसे वक्त में जब कम राजस्व और अधिक खर्च के कारण कई परियोजनाओं के भुगतान तक प्रभावित होने की स्थिति बनी है, सरकार का यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
नए वित्तीय निर्देशों में खाली पड़े सरकारी पद भी सरकार के रडार पर हैं। किसी विभाग में रिक्त पदों के नाम पर वेतन और भत्ते के लिए राशि की मांग करने पर रोक लगा दी गई है। यानी जिन पदों पर फिलहाल कर्मचारी तैनात नहीं हैं, उनके लिए अनावश्यक बजटीय प्रावधान करने की गुंजाइश कम कर दी गई है।वित्त विभाग ने सभी विभागों से गैरजरूरी राशि की पहचान कर उसे तय समयसीमा के भीतर सरकारी खजाने में वापस करने यानी सरेंडर करने को कहा है। इसके लिए 31 दिसंबर की समयसीमा निर्धारित की गई है।
सरकार ने राज्य की वित्तीय सेहत को दुरुस्त करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य भी तय किए हैं। वित्त विभाग का जोर राजस्व घाटे को शून्य रखने और राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखने पर है। इसके लिए जहां संभव हो, वहां गैरजरूरी खर्च में कटौती करने की हिदायत दी गई है।सरकार की कोशिश है कि सरकारी योजनाओं पर खर्च होने वाली रकम का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचे और खजाने पर ऐसे खर्च का बोझ न पड़े, जिसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आता।
वित्त विभाग ने बजट में किए जाने वाले अस्पष्ट या भरमाने वाले प्रावधानों को लेकर भी सख्ती दिखाई है। 'अन्य व्यय' और 'अन्य प्राप्तियां' जैसे मदों को गलत बजट प्रावधान मानते हुए इनके इस्तेमाल को बंद करने या सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं।जरूरत पड़ने पर ऐसे प्रावधानों को दूसरे स्पष्ट और उपयुक्त मदों में स्थानांतरित करने को कहा गया है। इसका मकसद बजट में पारदर्शिता बढ़ाना और सरकारी रकम के इस्तेमाल का स्पष्ट हिसाब रखना है।
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी भी शुरू कर दी है। सभी विभागों को 1 अक्टूबर तक अपने बजट प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले वित्त वर्ष का बजट केवल जरूरत आधारित प्रस्तावों पर तैयार किया जाएगा।विभागों को तय प्रारूप में अगले साल की योजनाओं और उनसे जुड़ी वित्तीय जरूरतों की जानकारी वित्त एवं योजना विभाग को देनी होगी। यानी आने वाले बजट में सिर्फ घोषणा या कागजी प्रावधान नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरत, उपयोगिता और वित्तीय क्षमता को प्राथमिकता देने की तैयारी है।सरकार के इन कड़े निर्देशों से साफ है कि बिहार में अब सरकारी खर्च के हर बड़े हिस्से की उपयोगिता पर सवाल उठेगा। फिजूलखर्ची पर कैंची चलेगी, बेकार योजनाओं का बोझ हटेगा और खजाने को मजबूत करने के लिए वित्तीय अनुशासन को और सख्त किया जाएगा।