बिहार में अब सड़क पर गाड़ी चलाना हुआ महंगा! स्टेट हाईवे- पुलों से गुजरने के लिए देना होगा टोल, 100 किमी का सफर 810 रुपए टैक्स

नई नियमावली के तहत कार, जीप और वैन जैसे हल्के निजी वाहनों के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल लिया जाएगा। वहीं भारी निर्माण वाहनों को 100 किमी का सफर 810 रुपए तक टैक्स देकर करना पड़ सकता है

Bihar to Charge Toll on State Highways and Bridges - फोटो : news4nation

Bihar toll tax : बिहार में अब सड़क पर सफर करना पहले के मुकाबले महंगा होने जा रहा है। अब तक जहां टोल टैक्स सिर्फ नेशनल हाईवे पर देना पड़ता था, वहीं अब राज्य सरकार की सड़कों, बड़े पुलों और बाईपास से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी टोल शुल्क चुकाना होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में 'पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026' को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से राज्य की सड़क परियोजनाओं के रखरखाव, उन्नयन और नई सड़कें विकसित करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।


नई नियमावली के तहत कार, जीप और वैन जैसे हल्के निजी वाहनों के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल लिया जाएगा। यानी यदि कोई वाहन चालक राज्य सरकार के टोल वाले मार्ग पर 100 किलोमीटर की यात्रा करता है तो उसे 125 रुपये का शुल्क देना होगा। इसी तरह हल्के व्यवसायिक वाहनों के लिए 2 रुपये प्रति किलोमीटर, दो एक्सल वाले बस और ट्रक के लिए 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर तथा बहु-अक्ष (मल्टी-एक्सल) और भारी निर्माण वाहनों के लिए 6.65 रुपये से 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर तक की दरें तय की गई हैं। ऐसे में बड़ी गाड़ियों को प्रति 100 किमी के सफर के लिए 810 रुपए का टोल टैक्स देना होगा। 


फास्टैग और डिजिटल भुगतान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि टोल वसूली पूरी तरह फास्टैग और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों से की जाएगी। इससे टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन कम होगा और वाहनों की आवाजाही भी तेज होगी। इसके साथ ही नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि सड़क की गुणवत्ता, रखरखाव की लागत और महंगाई को ध्यान में रखते हुए टोल दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी तथा आवश्यक होने पर इनमें संशोधन किया जा सकेगा।


'यूजर फीस' से बड़ा बोझ 

पथ निर्माण विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बिहार में राज्य राजमार्गों, बड़े पुलों, बाईपास और अन्य सड़क अवसंरचना का तेजी से विस्तार हुआ है। इन परियोजनाओं के रखरखाव और भविष्य के विस्तार के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था जरूरी थी। इसी उद्देश्य से 'यूजर फीस' यानी पथ उपयोगकर्ता शुल्क लागू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे सड़क नेटवर्क की गुणवत्ता बेहतर होगी और नई परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।


यात्री एवं माल भाड़ा बढ़ेगा 

हालांकि, इस फैसले के लागू होने के बाद राज्य में निजी वाहन चालकों, परिवहन व्यवसायियों और आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि टोल शुल्क बढ़ने का असर माल ढुलाई की लागत और सार्वजनिक परिवहन के किराए पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि नई टोल व्यवस्था कब से लागू होती है और किन-किन राज्य मार्गों, पुलों और बाईपास पर सबसे पहले इसे लागू किया जाएगा।