Bihar Cyber ​​Hub: देश में पहली बार? बिहार में बनेगा भारत का पहला एआई साइबर कंट्रोल हब, 16 मिनट का काम सिर्फ 5 मिनट में होगा पूरा

Bihar Cyber Hub: बिहार में साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। ...

बिहार में बनेगा भारत का पहला एआई साइबर कंट्रोल हब- फोटो : X

Bihar Cyber Hub: बिहार में साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। राज्य का साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणाली से जुड़ने जा रहा है, जिससे साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी की शिकायतों का निपटारा पहले से कहीं ज्यादा तेज, सटीक और प्रभावी हो सकेगा।इस नई व्यवस्था के बाद बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां एआई आधारित साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर पूरी तरह से लागू होगा। अधिकारियों के अनुसार यह सिस्टम अगले तीन से चार महीनों में तैयार कर लिया जाएगा। इसका मकसद है पीड़ितों को तुरंत राहत देना और “गोल्डन आवर” में कार्रवाई सुनिश्चित करना, ताकि ठगी की रकम को समय रहते फ्रीज किया जा सके।

वर्तमान में 1930 कॉल सेंटर पर शिकायतें मानव ऑपरेटरों द्वारा मैन्युअल रूप से दर्ज की जाती हैं, जिसमें प्रति केस लगभग 16 से 18 मिनट लगते हैं। लेकिन नई तकनीक लागू होने के बाद यह समय घटकर मात्र 5 से 6 मिनट रह जाएगा। यह बदलाव न केवल गति बढ़ाएगा बल्कि प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी भी बनाएगा।

नई प्रणाली में एआई-सक्षम इंटरफेस, रियल-टाइम वॉयस-टू-टेक्स्ट तकनीक और संरचित प्रश्नावली के जरिए शिकायतकर्ता की जानकारी तुरंत डिजिटल रिकॉर्ड में बदल दी जाएगी। इससे गलतियों, टाइपिंग एरर और डेटा मिसमैच जैसी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह सिस्टम पैटर्न एनालिसिस भी करेगा, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किन डिजिटल माध्यमों या खातों से बार-बार ठगी हो रही है। इससे जांच एजेंसियों को अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था में बहुभाषी सुविधा भी जोड़ने की योजना है, ताकि राज्य के अलग-अलग इलाकों के लोग अपनी स्थानीय भाषा में भी आसानी से शिकायत दर्ज करा सकें। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा की पहुंच और मजबूत होगी।हाल ही में गठित साइबर अपराध और सुरक्षा इकाई  ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू किया है। फरवरी में इसके गठन के बाद 1930 हेल्पलाइन पर आईवीआरएस प्रणाली भी लागू कर दी गई है, जिससे कॉलर को स्वचालित प्रश्नों के जरिए प्रारंभिक जानकारी दी जाती है।इस प्रक्रिया में बैंक का नाम, खाता संख्या, ट्रांजेक्शन आईडी, यूटीआर नंबर, घटना की तारीख और संदिग्ध की जानकारी जैसी अहम डिटेल्स तुरंत दर्ज की जाती हैं।

इसके साथ ही कॉल सेंटर की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है मौजूदा 25 लाइनों को बढ़ाकर 50 करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि कॉल लोड बढ़ने पर भी शिकायत दर्ज करने में कोई देरी न हो। बहरहाल यह कदम बिहार में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक डिजिटल ढाल की तरह काम करेगा, जो आम जनता को ऑनलाइन ठगी के खतरों से तेज और प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगा।

हीरेश कुमार