स्कूलों में सफाई के नाम पर लूट: विधान परिषद में बरसे MLC जीवन कुमार, कहा- 'बंद हो एजेंसियों की मुनाफाखोरी
एमएलसी जीवन कुमार ने सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई के नाम पर हो रही लूट-खसोट का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाह्य एजेंसियां न केवल स्कूलों में गंदगी का अंबार छोड़ रही हैं, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर भी डाका डाल रही हैं।
Patna - बिहार विधान परिषद में शुक्रवार को सरकारी स्कूलों की साफ-सफाई व्यवस्था में व्याप्त 'एजेंसी राज' और भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से गूंजा. माननीय विधान पार्षद जीवन कुमार ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा की जा रही भारी अनियमितता, लूट-खसोट और मजदूरों के शोषण का मामला उठाते हुए विभाग की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने सदन को अवगत कराया कि एजेंसियों के मनमाने रवैये के कारण शिक्षा व्यवस्था और स्वच्छता अभियान दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
सदन में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए एमएलसी जीवन कुमार ने बताया कि स्कूलों में सफाई का जिम्मा संभालने वाली एजेंसियां अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं. उन्होंने निरीक्षण के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि स्कूलों में अक्सर गंदगी का अंबार मिलता है. जब इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापकों से पूछताछ की जाती है, तो वे अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताते हैं कि सफाई कर्मी उनकी बात नहीं सुनते और सीधे कहते हैं कि उनकी बहाली विभाग द्वारा की गई है, जिससे विद्यालय प्रशासन का उन पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है.
जीवन कुमार ने एजेंसियों द्वारा किए जा रहे 'मुनाफाखोरी के धंधे' और आर्थिक शोषण की पोल खोलते हुए कहा कि ये कंपनियां गरीब सफाई कर्मियों का हक मार रही हैं. एजेंसियों को सरकार से जो राशि आवंटित की जाती है, उसका महज आधा हिस्सा ही मजदूरों को भुगतान किया जाता है और शेष राशि एजेंसियां डकार जाती हैं. यही नहीं, जमीनी स्तर पर काम किए बिना ही प्रधानाध्यापकों पर अनुचित दबाव बनाकर 'संतुष्टि प्रमाण पत्र' (Satisfaction Certificate) प्राप्त कर लिया जाता है, जिसके आधार पर सरकारी खजाने से भुगतान उठा लिया जाता है.
इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एमएलसी ने सदन में दो प्रमुख सुझाव रखे. उन्होंने मांग की कि इस पूरी तरह विफल हो चुके 'एजेंसी सिस्टम' को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाना चाहिए. इसके विकल्प के रूप में उन्होंने विद्यालय स्तर पर एक स्थानीय निगरानी कमेटी गठित करने का सुझाव दिया, जो सीधे तौर पर सफाई कार्यों की रिपोर्ट दे सके. सदन के अन्य सदस्यों ने भी मेज थपथपाकर जीवन कुमार के इन तर्कों का पुरजोर समर्थन किया और इसे विभाग व बिचौलियों की मिलीभगत करार दिया.
सरकार की ओर से जवाब देते हुए माननीय मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ एजेंसियों के खिलाफ अनियमितता की शिकायतें मिली हैं, जिसके आधार पर अब तक चार एजेंसियों को कार्यमुक्त किया जा चुका है. सरकार ने जीवन कुमार के सुझावों का स्वागत करते हुए आश्वासन दिया कि विद्यालय प्रबंधन समिति, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधि शामिल होते हैं, उनकी भूमिका इस व्यवस्था में सुनिश्चित करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. साथ ही, भविष्य में सफाई कर्मियों की उपस्थिति को पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी व्यवस्था लागू करने की बात भी कही गई.
रिपोर्ट - वंदना शर्मा