भ्रष्टाचार पर बिहार विजिलेंस का कड़ा प्रहार: 2 महीने में दो दर्जन से ज्यादा केस दर्ज, डीजी जीएस गंगवार ने जारी किए आंकड़े

बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने साल 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि विभाग कर्मियों की कमी की समस्या से जूझ रही है।

Patna - : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग साल 2026 में भी तेजी से जारी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जीएस गंगवार ने जानकारी दी है कि इस वर्ष के शुरुआती दो महीनों में ही ब्यूरो ने 28 मामले दर्ज किए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत विभाग 24 घंटे कार्यरत है।

जनवरी और फरवरी में कार्रवाई की रफ्तार

डीजी जीएस गंगवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि साल 2026 के पहले दो महीनों (जनवरी और फरवरी) में अब तक कुल 28 केस दर्ज किए जा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, विभाग द्वारा हर महीने औसतन 14 कांड दर्ज किए जा रहे हैं। इन मामलों में रिश्वत (Bribe) लेने और आय से अधिक संपत्ति (DA) रखने, दोनों ही तरह के गंभीर कांड शामिल हैं।

सजा दिलाने की दर में हुआ सुधार

निगरानी ब्यूरो के लिए इस साल की एक बड़ी उपलब्धि सजा दिलाने की प्रक्रिया में तेजी आना है। डीजी ने बताया कि इस साल अब तक चार कांडों में सजा सुनाई जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष सजा पाने वाले अपराधियों की संख्या पिछले साल (30 केस) की तुलना में कहीं अधिक होगी। विभाग का लक्ष्य त्वरित जांच और प्रभावी अभियोजन के जरिए भ्रष्ट अधिकारियों को अंजाम तक पहुँचाना है।

कर्मियों की कमी बनी बड़ी चुनौती

कार्रवाई में तेजी के बावजूद निगरानी ब्यूरो मैनपावर की कमी से जूझ रहा है। डीजी गंगवार ने खुलासा किया कि ब्यूरो में इंस्पेक्टर और डीएसपी स्तर के एक-तिहाई पद रिक्त हैं। कर्मियों की इस भारी कमी के कारण काम का दबाव बढ़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर और अधिक कर्मियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) करने का अनुरोध किया गया है।

24 घंटे अलर्ट मोड पर विजिलेंस कार्यालय

आम जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए निगरानी कार्यालय 24 घंटे कार्यरत है। डीजी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार की सूचना मिलते ही ब्यूरो की टीम त्वरित कार्रवाई करती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई सरकारी सेवक रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत इसकी जानकारी निगरानी ब्यूरो को दें।

रिपोर्ट - अनिल कुमार