TRE-4 आंदोलन से 22 घंटे पहले BPSC में बवाल, कुत्ते भौंके हजार वाली टिप्पणी पर IAS निलंबित
BPSC: टीआरई-4 आंदोलन की आहट के बीच बिहार में बीपीएससी को लेकर ऐसा विवाद भड़क उठा कि महज कुछ घंटों में सरकार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेना पड़ा।...
BPSC: टीआरई-4 आंदोलन की आहट के बीच बिहार में बीपीएससी को लेकर ऐसा विवाद भड़क उठा कि महज कुछ घंटों में सरकार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेना पड़ा। बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह की अभ्यर्थियों को लेकर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी ने सियासी और छात्र राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया। विवाद बढ़ने के करीब चार घंटे के भीतर सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।
मामला सोमवार दोपहर करीब 2 बजे का बताया जा रहा है। बीपीएससी की ओर से टीआरई-4 आंदोलन से पहले आयोग का पक्ष स्पष्ट करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी। इसमें सचिव हेमंत कुमार सिंह और परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह मौजूद थे। इसी दौरान अनौपचारिक बातचीत में अभ्यर्थियों के आंदोलन और उनकी मांगों के संदर्भ में राजेश कुमार सिंह ने कथित तौर पर “हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार” वाली कहावत कह दी।अधिकारी ने बातचीत को ऑफ-द-रिकॉर्ड रखने का आग्रह किया था, लेकिन कुछ ही देर में टिप्पणी सार्वजनिक हो गई। अभ्यर्थियों ने इसे सीधे तौर पर अपमानजनक माना और मामला देखते ही देखते तूल पकड़ गया। छात्रों के आक्रोश के बीच राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई।
एक बयान और शुरू हो गया सियासी घमासान
दोपहर करीब 3 बजे राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव गर्दनीबाग धरना स्थल पहुंच गए। उन्होंने आंदोलनरत अभ्यर्थियों से मुलाकात की और बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। तेजस्वी यादव ने इसे छात्रों का अपमान बताते हुए बीपीएससी से माफी की मांग की और कहा कि लोकतंत्र में ऐसी भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती।इसके बाद रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया पर कथित अमर्यादित भाषा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठाई। देखते ही देखते मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्र आंदोलन और सियासी दबाव का केंद्र बन गया।
शाम 5 बजे सफाई, फिर सरकार का एक्शन
विवाद बढ़ने के बाद शाम करीब 5 बजे परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी को आहत करना नहीं था और उन्होंने केवल एक लोकोक्ति का इस्तेमाल किया था, जिसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। इसके साथ उन्होंने खेद भी जताया।लेकिन विवाद थमा नहीं। छात्रों के आक्रोश और आंदोलन की गंभीरता के बीच शाम करीब 6 बजे सरकार ने कार्रवाई कर दी। राजेश कुमार सिंह को तत्काल निलंबित किए जाने की बात सामने आई।
सरकार के एक्शन के पीछे क्या संदेश?
पहला संदेश साफ था टीआरई-4 आंदोलन से ठीक पहले सरकार छात्र असंतोष को और भड़कने देना नहीं चाहती थी। दूसरा, तेजस्वी यादव के धरना स्थल पहुंचने के बाद मामला राजनीतिक दबाव के दायरे में आ गया। तीसरा और सबसे अहम पहलू था कथित ‘ऑफ-द-रिकॉर्ड’ टिप्पणी का सार्वजनिक होना। प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी से अभ्यर्थियों के प्रति ऐसी भाषा के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हुए।
अब निलंबन के बाद बीपीएससी और सरकार की अगली रणनीति पर नजर है। टीआरई-4 आंदोलन से ठीक पहले हुआ यह घटनाक्रम अभ्यर्थियों के गुस्से, प्रशासनिक जवाबदेही और सियासी दबाव—तीनों को एक ही मोर्चे पर ला खड़ा करता है।