Bihar Budget Session 2026 - अब तक का सबसे छोटा होगा बिहार का बजट सत्र! 2 फरवरी होगा शुरू, इतने दिन चलेगी बैठक
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में बजट सत्र के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह सत्र 2 फरवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा
Patna - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में बजट सत्र के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह सत्र 2 फरवरी 2026 से शुरू होकर 25 फरवरी 2026 तक चलेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जहाँ से अनुमति मिलते ही राजभवन द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव पेश करेंगे आम बजट
इस सत्र के दौरान बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट सदन के पटल पर रखेंगे। यह नई सरकार का पहला पूर्ण बजट सत्र होगा, जिसमें सरकार अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं और विकास के विजन को जनता के सामने रखेगी। वर्तमान में वित्त विभाग बजट की बारीकियों को अंतिम रूप देने की तैयारियों में तेजी से जुटा हुआ है।
बजट की संभावित प्राथमिकताएं: शिक्षा और रोजगार पर जोर
आगामी बजट में सरकार का मुख्य फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर रह सकता है। इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने और महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए विशेष बजटीय प्रावधान की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर भी सरकार अतिरिक्त जोर दे सकती है।
सत्र की अवधि और कार्यदिवसों का विवरण
बजट सत्र की कुल अवधि लगभग 24 दिनों की है, लेकिन शनिवार, रविवार और अन्य अवकाशों को हटाकर कुल 14 कार्यदिवस (बैठकें) होने की संभावना है। सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा, जिसके बाद बजट पेश करने, उस पर सामान्य विमर्श और विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा की जाएगी। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के जरिए कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपन्न किए जाएंगे।
विपक्ष की रणनीति और सत्र का महत्व
ऐतिहासिक रूप से बजट सत्र को सबसे उत्पादक माना जाता है, जहाँ पूर्व में 80 घंटे से अधिक कामकाज के रिकॉर्ड रहे हैं। इस बार विपक्ष ने भी महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को सदन में घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पेश होने की भी संभावना है, जो राज्य के विकास की दिशा तय करेंगे।
सत्र का ऐतिहासिक संदर्भ (कार्यदिवस विश्लेषण)
बिहार विधानसभा के कामकाज के पिछले आंकड़ों के आधार पर सत्र की उत्पादकता को समझा जा सकता है:
- वार्षिक औसत: 17वीं विधानसभा (2020-2025) के दौरान सदन की बैठकें प्रति वर्ष औसतन 29 दिन ही हुईं।
- पिछला रिकॉर्ड: पिछले पांच वर्षों में सदन कुल 146 दिन ही चला, जो कि देश की अन्य विधानसभाओं की तुलना में काफी कम है।
- बजट सत्र की महत्ता: कम बैठकों के बावजूद बजट सत्र सबसे उत्पादक सत्र माना जाता है, जहाँ पूर्व में तीन मौकों पर 80 घंटे से अधिक कामकाज हुआ है।