Bihar Cabinet Social Engineering:सम्राट कैबिनेट का जातीय गणित तैयार, NDA ने MY समीकरण को दी सीधी चुनौती,पढ़िए बिहार के चौधरी की सोशल इंजीनियरिंग

Bihar Cabinet Social Engineering:सम्राट कैबिनेट दरअसल NDA का ऐसा सोशल इंजीनियरिंग मॉडल है, जिसे सीधे तौर पर RJD के MY समीकरण की काट के रूप में तैयार किया गया है। ...

सम्राट कैबिनेट का मेगा सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Cabinet Social Engineering: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए कैबिनेट विस्तार को केवल मंत्रिमंडल गठन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सियासी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इस विस्तार ने साफ संकेत दे दिया है कि NDA अब 2026 के चुनावी रण के लिए जातीय और सामाजिक समीकरणों को बेहद सावधानी से साधने में जुट चुका है।नई कैबिनेट में जातीय संतुलन को सबसे बड़ा आधार बनाया गया है। बिहार की करीब 36 प्रतिशत आबादी वाले अति पिछड़ा वर्ग यानी EBC को साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है। केदार गुप्ता, रमा निषाद और दिलीप जायसवाल जैसे चेहरों को शामिल कर NDA ने EBC वोट बैंक को मजबूत संदेश दिया है। वहीं शीला मंडल को जगह देकर धानुक समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

सबसे बड़ा राजनीतिक सरप्राइज निशांत कुमार की एंट्री रही। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार ने आखिरकार मंत्री पद की शपथ लेकर यह स्पष्ट कर दिया कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत अब परिवार के भीतर ही आगे बढ़ेगी। बिहार की सियासत में काफी समय से चल रही अटकलों पर इस कदम ने लगभग विराम लगा दिया है।

भाजपा ने अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक को भी साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विजय कुमार सिन्हा और नीतीश मिश्रा के जरिए भूमिहार और ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व मिला, जबकि संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाकर राजपूत समाज को मजबूत संदेश दिया गया।

वहीं बिहार की राजनीति में लंबे समय से निर्णायक माने जाने वाले लव-कुश समीकरण पर भी सबसे ज्यादा भरोसा जताया गया है। खुद सम्राट चौधरी कोयरी समाज से आते हैं। उनके साथ श्रवण कुमार, भगवान सिंह कुशवाहा, निशांत कुमार और दीपक प्रकाश को शामिल कर कुर्मी-कोयरी वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की गई है।

एनडीए ने मुस्लिम और दलित समीकरण पर भी खास ध्यान दिया है। जदयू कोटे से जमा खान को शामिल कर गठबंधन ने अपनी सेकुलर छवि को बनाए रखने का संदेश दिया है। वहीं अशोक चौधरी, रत्नेश सादा और संतोष मांझी के जरिए महादलित समाज को साधने की रणनीति अपनाई गई है।

इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी से लखेंद्र पासवान और संजय पासवान को मंत्री बनाकर पासवान वोट बैंक को भी मजबूत संदेश दिया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट कैबिनेट दरअसल NDA का ऐसा सोशल इंजीनियरिंग मॉडल है, जिसे सीधे तौर पर RJD के MY समीकरण की काट के रूप में तैयार किया गया है। निशांत कुमार की एंट्री ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यसभा जाने के बाद भी बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का असर कम नहीं हुआ, बल्कि नई पीढ़ी के जरिए उसे और विस्तार देने की तैयारी शुरू हो चुकी है।