सावधान! पटना-मुजफ्फरपुर समेत 6 जिले हादसों के 'हॉटस्पॉट', अब सरकार करेगी आर-पार की कार्रवाई

: देशभर में 100 ऐसे जिलों को चिह्नित किया गया है, जहां सड़क दुर्घटनाएं बड़ी संख्या में होती हैं। इनमें बिहार के छह जिले पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं।

सावधान! पटना-मुजफ्फरपुर समेत 6 जिले हादसों के 'हॉटस्पॉट', अब सरकार करेगी आर-पार की कार्रवाई- फोटो : News 4 Nation AI

देश भर में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 100 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां सबसे अधिक हादसे होते हैं। इस सूची में बिहार के छह प्रमुख जिले—पटनामुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं। इन जिलों को 'जीरो फैटेलिटी' (शून्य मृत्यु दर) जिलों के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या को न्यूनतम या पूरी तरह खत्म किया जा सके।


भारत मंडपम में केंद्रीय बैठक और मंत्री का संबोधन

यह जानकारी बिहार के परिवहन सह ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्री शामिल हुए थे। श्रवण कुमार ने बताया कि बिहार सरकार इन चिह्नित जिलों में सुरक्षा मानकों को बढ़ाने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है।

दुर्घटना के कारणों की पहचान और सुधार पर जोर

मंत्री श्रवण कुमार ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इन छह जिलों में दुर्घटनाओं के पीछे के मुख्य कारणों को चिह्नित कर रही है। इसमें सड़क की बनावट में खामियां (ब्लैक स्पॉट्स), यातायात नियमों का उल्लंघन और जन-जागरूकता की कमी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन जिलों में बुनियादी ढांचे में सुधार कर और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाकर जीवन बचाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

जीरो फैटेलिटी का लक्ष्य और भविष्य की योजना

बिहार सरकार का उद्देश्य इन जिलों को सुरक्षा के लिहाज से एक मॉडल के रूप में पेश करना है। 'जीरो फैटेलिटी' पहल के तहत आधुनिक तकनीक, बेहतर सड़क संकेत और सख्त प्रवर्तन प्रणाली लागू की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि यदि इन छह संवेदनशील जिलों में मौतों का आंकड़ा कम होता है, तो इससे राज्य की समग्र सड़क सुरक्षा रैंकिंग में बड़ा सुधार होगा और हजारों कीमती जानें बचाई जा सकेंगी।