NEET Student Rape Death: हार गई 'सम्राट' की पुलिस, नीट छात्रा हत्याकांड मामले में CBI दिलाएगी न्याय? कटघरे में बिहार पुलिस, जानिए अब तक क्या क्या हुआ?

NEET Student Rape Death: सम्राट चौधरी की पुलिस खुद अपने हार की गवाही दे रही है...पुलिस की कार्यशैली पर सिर्फ बिहार ही नहीं अब पूरा देश सवाल खड़ा कर रहा है...सम्राट चौधरी के दावे फेल तो हुए ही हैं साथ ही अब उनकी पुलिस भी कटघरे में खड़ी हो गई है...

हार गई सम्राट की पुलिस?- फोटो : News4nation

NEET Student Rape Death:  तो क्या हार गई 'सम्राट' की पुलिस?... यह एक सवाल या एक वाक्य नहीं है, यह एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जिसे जान बिहार पुलिस को शर्म आनी चाहिए। बिहार पुलिस जिसकी पहली प्राथमिकता हीं यहीं है कि वो राज्य के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें..अगर पुलिस इस काम में ही असफल रहेगी तो पीड़ित न्याय की गुहार को लेकर कहां जाएंगे? राजधानी पटना में नीट छात्रा हत्याकांड मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई है, पुलिस पर मामले की लीपापोती करने का गंभीर आरोप लगा. मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि पुलिस अब अपनी नाकमी नहीं छिपा पाई, सीबीआई को केस सौपना तो यहीं दिखा रहा है कि बिहार की पुलिस इस मामले में फेल कर गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने शनिवार की अहले सुबह केंद्र सरकार से मांग की कि इस मामले की जांच सीबीआई करे। इसकी जानकारी खुद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने दी। जी हां सम्राट चौधरी जो पहली बार बिहार के गृह मंत्री बनें हैं। गृह मंत्री बने तो उन्होंने कानून व्यवस्था सुधारने के बड़े बड़े दावे किए थे। जो दावे अब उनकी ही पुलिस फेल कर रही है। 

हार गई बिहार पुलिस? 

सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पर ट्विट कर कहा कि, "सीएम नीतीश ने भारत सरकार से पटना में हुए NEET छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को CBI से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए"। सम्राट चौधरी जब बिहार के गृह मंत्री बनें थे तब उन्होंने कहा था कि बिहार में अपराध और अपराधियों की कोई स्थान नहीं है, अपराधी या तो जेल में होंगे या जहन्नुम में होंगे। सम्राट चौधरी ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस को खुली छूट दे रखी है और पुलिस अपराध और अपराधी को कभी नहीं बख्सेगी। लेकिन क्या है जब उसी पुलिस पर आरोपियों को बचाने और केस को दबाने का आरोप लगे, जब पुलिस खुद गलत बयानबाजी कर मामले को उलझाने लगे, जब पुलिस ही मामले की लीपापोती में जुट जाए। तब सम्राट चौधरी क्या कहेंगे? अपनी पुलिस की नाकामी को क्या कहेंगे? अपनी पुलिस की शर्मनाक कृत्य को शर्मनाक हार को क्या नाम देंगे? शायद इसका जवाब अभी खुद उनके पास भी नहीं होगी। लेकिन गृह मंत्री जी को अब अपनी पुलिस की लापरवाही देखनी होगी। नीट छात्रा हत्याकांड उन मामलों में से ही एक मामला माना जा रहा है जहां पुलिस खुद अपराधियों को बचाने में जुटी हुई है। तमाम मीडिया रिपोर्ट, परिजन इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन कहीं ना कहीं उन्हें भी उम्मीद कम ही दिख रही है। 

CBI से जांच की अपील 

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत 11 जनवरी मेदांता अस्पताल में हुई....आज 31 जनवरी है...और खबर सामने आई है कि सीएम नीतीश ने इस मामले को सीबीआई को देने की मांग केंद्र सरकार से की है। यानी बिहार पुलिस इस मामले की जांच करने और सच का पता लगाने में नाकाम रही। अब हम जानते हैं कि आखिर इतने दिनों में क्या क्या हुआ है? पीड़िता जहानाबाद की रहने वाली थी, जो 5 जनवरी को अपने घर से पटना स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में पहुंचती है, अगले दिन यानी 6 जनवरी को पीड़िता को बेहोशी के हालात में अस्पताल लेकर जाया जाता है, पहले डॉ. सहजानंद के अस्पताल में और उसके बाद प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल...प्रभात मेमोरियल अस्पताल में पीड़िता 9 जनवरी तक रही जिसके बाद उसे मेदांता में रेफर कर दिया गया। मेदांता में 11 जनवरी को पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई। पीड़िता की मौत हो गई है। 6 जनवरी से लेकर पीड़िता की मौत होने तक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठी। 

रोशनी कुमारी को किया गया सस्पेंड 

इस मामले में हाल ही में पुलिस ने चित्रगुप्त नगर की थाना प्रभारी रोशनी कुमार को लापरवाही बरतने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में सस्पेंड कर दिया। साथ ही एक दारोगा को भी निलंबित किया गया। जिसके बाद पुलिस की लापरवाही खुलकर उजागर हुई। दरअसल, छात्रा 6 जनवरी को अस्पताल में भर्ती हुई मामला पहले दिन से ही संदेहास्पद था लेकिन इस मामले में थाना प्रभारी रोशनी कुमार ने खूब लापरवाही बरती, 3 दिनों तक पुलिस ने इस मामले में कोई भी जानकारी नहीं ली। थाना प्रभारी रोशनी ने हद ही कर दी अपने ड्राइवर को बोली कि जाकर पता करो कि ये हॉस्टल कहां है...। वहीं जब छात्रा की मौत हुई तो पुलिस के तमाम वरीय अधिकारी, एसपी, एएसपी, एसएसपी ने मीडिया के समक्ष बयान दिया कि छात्रा ने खुदकुशी कर ली है, तमाम वरीय अधिकारियों ने इस मामले में कोई जांच कोई पड़ताल नहीं कि और बयान दे दिया। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल 

जिसके बाद छात्रा की पोस्टमार्टम हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म की आशंका जताई गई। पुलिस ने इस रिपोर्ट को जांच के लिए एम्स में भी भेजा, लेकिन एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें पूरी रिपोर्ट और कागजात नहीं सौंपे गए हैं जिसके कारण उनकी जांच पूरी नहीं हुई है, हालांकि इस मामले में फिलहाल पुलिस की ओर कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं इसके बाद एफएसएल की रिपोर्ट सामने आई जिसमें छात्रा के कपड़ों पर पुरुष का स्पर्म पाया गया। जिसके बाद इस मामले में गंभीर तूल पकड़ लिया। अब तक जो पुलिस इसे आत्महत्या करार दे रही थी उसने इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया। इस घटना के बाद पुलिस पर तमाम सवाल खड़े होने लगे। पुलिस ने इस मामले में करीब 25 लोगों का डीएनए सैंपल लिया। 25 में से 15 लोग पीड़िता के परिवार से हैं। एफएसएल जांच में सामने आया कि आरोपी 18 से 24 साल के बीच में हो सकता है। फिलहाल पुलिस पूरी रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।    

डीजीपी से मिलने के बाद आक्रोशित हुए परिजन

इसी बीच शुक्रवार को बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने पीड़िता के परिजनों को पटना मिलने के लिए बुलाया। डीजीपी से मिलने के बाद परिजन आक्रोशित दिखें। परिजनों ने डीजीपी से मुलाकात के बाद आरोप लगाया कि पुलिस बिक गई है। उनकी बेटी को न्याय नहीं दिया जाएगा। मामले को दबाया जा रहा है। परिजनों की ओर से सबसे बड़ा आरोप लगा कि डीजीपी ने दवाब डाला कि आपकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है आप इस बात को मान लीजिए और जब उन्होंने मानने से इनकार किया तो बोला गया कि आप गृह मंत्री सम्राट चौधरी से मिलने चलिए। हालांकि परिजनों ने गृह मंत्री से मुलाकात नहीं की और अपने घर चले गए। शुक्रवार को पूरा दिन इस मामले में हाईवोल्टेज ड्रामा से भरा हुआ रहा। वहीं अब शनिवार को सीएम नीतीश ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की अपील कर दी है। इतने दिनों में बिहार पुलिस की कार्रवाई और बिहार पुलिस के कार्यशैली पर तमाम सवाल उठे। जिसे News4Nataion ने आपके सामने तथ्यों के आधार पर रखा। 

इस मामले में उठ रहे सवाल? 

1.जांच क्यों नहीं हुई

2.सबूत सुरक्षित क्यों नहीं रखे गए

3.मामले को दबाने की कोशिश क्यों की गई...

4.नीलम अग्रवाल कहां है

5.मनीष रंजन का इस कांड से क्या लेना देना है..जो उसे जेल भेजा गया.

6. कितने लोगों का DNA सैंपल लिया जाएगा ?

7. अगर सैंपल किसी से मैच नहीं हुआ तो आगे जांच की दिशा क्या होगी ?

8. मनीष रंजन को छोड़कर और किस किस की गिरफ्तारी हुई?

9.AIIMS रिपोर्ट में और कितना वक्त लगेगा, एम्स को जांच के लिए सभी आवश्यक सामान पहले दिन ही क्यों नहीं दिय़ा ? 

10. अभी तक बिसरा रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है ?

11. नीलम अग्रवाल को क्यों नहीं पकड़ा गया ?

12. मनीष रंजन को रिमांड पर क्यूं नहीं लिया गया ?

13. यह केस अभी तक ब्लाइंड नजर आ रहा है, पुलिस पारिस्थितिजन्य साक्ष्य के आसरे चल रही है। लेकिन जिस अधिकारी के द्वारा साक्ष्य मिटाने का अवसर अपराधियों को दी गई उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं ?

14. कार्य में लापरवाही और गलतबयानी के लिए जिम्मेदारी अधिकारी पर बिहार सरकार का क्या रूख है?

15 वरीय पुलिस अधिकारियों पर लग रहे आरोपों पर कोई बयान क्यों नहीं दिया जा रहा?

CBI करेगी जांच 

इस मामले में अब अगर मंजूरी मिल जाती है तो जांच सीबीआई के हाथों में चली जाएगी। सीबीआई अब नए सिरे से इस पूरे मामले में सबूत इकठ्ठा करेगी। जांच को आगे बढ़ाएगी। तथ्यों की जांच करेगी। यानी जो केस पहले आत्महत्या बताई जा रही थी उसकी एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद दुष्कर्म और हत्या के रुप में जांच शुरु हुई। सीबीआई के हाथ में केस जाने के बाद अब तक जो घटनाक्रम सामने आए हैं उससे तो साफ है कि बिहार पुलिस के तमाम दावे और निष्पक्ष कार्रवाई के दावे फेल हो गए हैं। सम्राट चौधरी की पुलिस इस माममे में ना सिर्फ हारी है बल्कि अपनी कार्यशैली को भी कटघरे में भी खड़ा कर दिया है।