Bihar Pharmacy Colleges : बिहार के फार्मेसी कॉलेजों पर CBI की कार्रवाई, PCI चेयरमैन पर भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े तार, लटकी तलवार

Bihar Pharmacy Colleges :दावा है कि कई निजी फार्मेसी कॉलेज वर्षों से बिना पर्याप्त शिक्षक, छात्र संख्या और बुनियादी ढांचे के संचालित हो रहे हैं, इसके बावजूद PCI हर वर्ष निरीक्षण कर उन्हें मान्यता देता आ रहा है।

फार्मेसी कॉलेजों पर CBI की तलवार - फोटो : social media

Bihar Pharmacy Colleges : बिहार के फार्मेसी कॉलेजों पर सीबीआई की जांच की तलवार लटक गई है। सीबीआई की कार्रवाई तेज हो गई है। दरअसल, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के चेयरमैन डॉ. मोंटू पटेल पर फर्जी फार्मेसी कॉलेजों को मान्यता देने और करीब 5400 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में बिहार से भी कनेक्शन सामने आया है। जांच के दौरान CBI को डॉ. मोंटू पटेल की डायरी से बिहार से जुड़े संपर्क सूत्रों के नाम और मोबाइल नंबर मिलने की जानकारी सामने आई है। 

सीबीआई की जांच तेज 

इसके बाद बिहार के फार्मेसी कॉलेजों की CBI जांच की मांग तेज हो गई है। डिप्लोमा फार्मासिस्ट ऑर्गेनाइजेशन छात्र संघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने इस मामले को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पत्र लिखते हुए बिहार के सभी फार्मेसी कॉलेजों की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की है। अरविंद कुमार का आरोप है कि बिहार में वर्तमान में लगभग 100 फार्मेसी कॉलेज संचालित हैं, जिनमें से केवल 7 सरकारी हैं जबकि शेष निजी कॉलेज हैं।

पीसीआई पर आरोप 

उनका दावा है कि कई निजी फार्मेसी कॉलेज वर्षों से बिना पर्याप्त शिक्षक, छात्र संख्या और बुनियादी ढांचे के संचालित हो रहे हैं, इसके बावजूद PCI हर वर्ष निरीक्षण कर उन्हें मान्यता देता आ रहा है। छात्र संघ ने मांग की है कि पिछले 10 वर्षों में जिन फार्मेसी कॉलेजों को मान्यता दी गई है, उनकी गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप है कि ऑनलाइन निरीक्षण और कागजी खानापूर्ति के आधार पर कॉलेजों को मान्यता दी गई, जबकि जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

छात्र संघ की चेतावनी 

छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द CBI जांच का आदेश नहीं दिया गया तो संगठन को राज्यव्यापी आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। छात्र संघ के अनुसार CBI जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि PCI के कई निरीक्षण महज जूम कॉल और औपचारिकता बनकर रह गए थे। ऐसे में आशंका है कि बिहार के फार्मेसी कॉलेज भी इसी कथित सिस्टम का हिस्सा हो सकते हैं।

नकारात्मक रिपोर्ट के बाद भी दी गई मान्यता 

संगठन का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी PCI की कार्यशैली को मनमाना और गैर-जिम्मेदाराना बता चुके हैं और इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की बात कह चुके हैं। आरोपों के मुताबिक कई निजी फार्मेसी कॉलेजों में स्थायी फैकल्टी की भारी कमी है। लैब, लाइब्रेरी और अस्पताल प्रशिक्षण (हॉस्पिटल टाई-अप) केवल कागजों तक सीमित हैं। छात्रों की उपस्थिति, परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया में अनियमितताओं के साथ-साथ कुछ कॉलेजों में स्वीकृत सीटों से अधिक नामांकन दिखाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। इतना ही नहीं, जिन कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट नकारात्मक रही, उन्हें भी बाद में मान्यता दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं।