Bihar Politics : नीतीश के सिपाही की बगावत ! जदयू से 22 साल का रिश्ता तोड़ भावुक हुए डॉ. चंदन, 'मठाधीशों' पर लगाया उपेक्षा का गंभीर आरोप
Bihar Politics : 22 सालों की सेवा के बाद जदयू के प्रदेश सचिव डॉ. चंदन कुमार यादव ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. ...पढ़िए आगे
PATNA : बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर संगठनात्मक घमासान उस वक्त तेज हो गया, जब पार्टी के कद्दावर नेता और प्रदेश सचिव डॉ. चंदन कुमार यादव ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से अचानक इस्तीफा दे दिया। डॉ. चंदन ने संगठन में समर्पित कार्यकर्ताओं की निरंतर हो रही उपेक्षा और पार्टी के भीतर पनपती 'परिक्रमा संस्कृति' को अपने इस्तीफे का मुख्य कारण बताया है। उनके इस कड़े फैसले ने जदयू के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और पुराने 'नीतीशवादी' कार्यकर्ताओं के भविष्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
प्रदेश अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा
प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को भेजे गए अपने त्यागपत्र में डॉ. चंदन ने पार्टी के भीतर सक्रिय कुछ 'स्वयंभू नेताओं' पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पार्टी मुख्यालय में बैठे कुछ मठाधीशों की चापलूसी करना अनिवार्य हो गया है और जो लोग उनकी परिक्रमा करते हैं, उन्हें ही संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दशकों से पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले समर्पित साथियों को अब जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है।
भावुक हुए चन्दन
इस्तीफे की घोषणा के समय डॉ. चंदन कुमार यादव काफी भावुक नजर आए और उन्होंने अपने 22 वर्षों के लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने छात्र जीवन से ही नीतीश कुमार की विचारधारा को सींचने का काम किया है। उन्होंने उस दौर का जिक्र किया जब बिहार में राजद के बाहुबलियों का खौफ चरम पर था और कार्यकर्ता सड़कों पर निकलने से डरते थे, तब उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जदयू का झंडा बुलंद किया था। डॉ. चंदन के अनुसार, आज पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और पुराने कार्यकर्ताओं की कोई उपयोगिता नहीं बची है।
कई इस्तीफों का दावा
इस्तीफा देने के बाद डॉ. चंदन ने एक बड़ा दावा करते हुए पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो केवल एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में पटना में कई अन्य बड़े नेता भी जदयू को अलविदा कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि लाखों समर्पित कार्यकर्ताओं को आज यह महसूस कराया जा रहा है कि पार्टी में उनकी मेहनत का कोई मोल नहीं है। भविष्य की राजनीति के सवाल पर उन्होंने फिलहाल किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की बात से इनकार किया, लेकिन समाज सेवा के जरिए जनता के बीच सक्रिय रहने का संकल्प दोहराया।
पार्टी के लिए टेंशन
डॉ. चंदन यादव का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब जदयू शीर्ष नेतृत्व संगठन को नए सिरे से मजबूत करने का दावा कर रहा है। उनके इस कदम ने जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के कार्यकर्ताओं के बीच व्याप्त असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अपने पुराने 'नीतीशवादी' कैडरों की इस नाराजगी को कैसे दूर करती है या फिर इस्तीफों का यह सिलसिला आगे और बढ़ता है।