CM नीतीश का हाईटेक सुरक्षा घेरा: अब सादगी छोड़ ₹2.5 करोड़ की बुलेटप्रूफ रेंज रोवर में चलेंगे मुख्यमंत्री
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए राज्य सरकार ने उनके बेड़े में दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली गाड़ियाँ शामिल करने का निर्णय लिया है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही बुलेटप्रूफ और हाईटेक 'रेंज रोवर' गाड़ी में सफर करते नजर आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के काफिले के लिए एक नहीं बल्कि चार रेंज रोवर गाड़ियाँ खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर का बनाने के उद्देश्य से लिया गया यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने आधिकारिक दौरों के दौरान इसी हाई-सिक्योरिटी एसयूवी का उपयोग करते हैं।
सुरक्षा के लिए करोड़ों का निवेश
इन लग्जरी और हाई-एंड एसयूवी गाड़ियों की कीमत काफी अधिक है। बताया जा रहा है कि एक गाड़ी की लागत ₹2.5 करोड़ से अधिक होगी। प्रशासन का तर्क है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन गाड़ियों की खरीद अनिवार्य हो गई थी। तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद इन्हें जल्द ही बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा।
अब तक की सादगी और वर्तमान वाहन
अब तक नीतीश कुमार अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए जाने जाते रहे हैं। वर्तमान में वे पटना के भीतर हुंडई की 'आयोनिक 5' (इलेक्ट्रिक वाहन) का उपयोग करते हैं, जिसकी कीमत लगभग ₹50 लाख है और वह बुलेटप्रूफ नहीं है। वहीं, पटना से बाहर के दौरों के लिए वह टाटा सफारी का इस्तेमाल करते हैं। यह पहली बार होगा जब मुख्यमंत्री भारतीय कंपनियों और इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़ रेंज रोवर जैसी विदेशी और बेहद महंगी गाड़ी में सफर करेंगे।
रेंज रोवर की सुरक्षा विशेषताएं
रेंज रोवर को दुनिया की सबसे सुरक्षित गाड़ियों में गिना जाता है। वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा के लिए इसमें विशेष रूप से बुलेटप्रूफ बॉडी, अत्यधिक मजबूत ढांचा, एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम और कई गुप्त सुरक्षा फीचर्स दिए जाते हैं। यह गाड़ी न केवल धमाकों और गोलियों को झेलने में सक्षम है, बल्कि कठिन रास्तों पर भी बेहद तेज गति और स्थिरता के साथ चल सकती है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में काफी कारगर साबित होती है।
सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने का लक्ष्य
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव केवल लग्जरी के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप लिया गया एक आवश्यक कदम है। कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता भी इसी तरह के सुरक्षा घेरे का उपयोग करते हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री के आधिकारिक दौरों और जनसभाओं के दौरान उनके सुरक्षा तंत्र को किसी भी संभावित खतरे के विरुद्ध पूरी तरह अभेद्य बनाना है।