Patna Rail: रेलवे की सियासी बिसात पर पेंडुलम सेवा का मास्टरस्ट्रोक, दानापुर रेल डिवीजन का लोगों को तोहफा, अब डेली पैसेंजर्स के लिए अच्छे दिन
Patna Rail: बिहार की सियासी सरगर्मी के बीच रेल महकमे ने आम अवाम, खासकर मध्यम वर्ग के लिए एक ऐसा तुरुप का इक्का फेंका है, जिसने मुसाफिरों की दुनिया बदल दी है।
Patna Rail: बिहार की सियासी सरगर्मी के बीच रेल महकमे ने आम अवाम, खासकर मध्यम वर्ग के लिए एक ऐसा तुरुप का इक्का फेंका है, जिसने मुसाफिरों की दुनिया बदल दी है। दानापुर रेल डिवीजन ने लंबी दूरी की ट्रेनों में बढ़ती भीड़भाड़ और यात्रियों की जद्दोजहद को देखते हुए 'पेंडुलम सेवा' की शुरुआत की है। यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों, बैंकर्स और मुलाजिमों के लिए राहत का पैगाम है, जो हर रोज रोटी-रोजी के लिए ट्रेनों में धक्के खाने को मजबूर थे।
दानापुर रेल डिवीजन के सीनियर डीसीएम अभिनव सिद्धार्थ ने इस अवाम-परस्त (जनता के अनुकूल) फैसले की तस्दीक की है। उन्होंने बताया कि इस पेंडुलम सेवा को झाझा से दानापुर और बक्सर से पटना के बीच इस तरह तर्तीब (क्रमबद्ध) दिया गया है कि सुबह के वक्त छात्र और कामकाजी लोग अपने गंतव्य तक वक्त पर पहुंच सकें।
वहीं, शाम को घर वापसी के लिए भी वक्त का ऐसा तालमेल बिठाया गया है कि किसी की मसरूफियत (व्यस्तता) में खलल न पड़े। यह कदम रेलवे की उस दूरदर्शिता का सबूत है, जहां मुसाफिरों की दुश्वारियों को खत्म करना ही असल मकसद है।
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खूबी इसका आधुनिक WAG इंजन है। भारतीय रेल के इस ताकतवर इंजन की बदौलत ट्रेन की रफ्तार और पाबंदी-ए-वक्त (समय की पाबंदी) पर खास जोर दिया गया है।
ट्रेन में महिलाओं की इबादत और गरिमा का ख्याल रखते हुए आधुनिक टॉयलेट और बेहतर सीटों की व्यवस्था की गई है।लवे का यह योजना बिल्कुल वैसा ही है जैसा मुंबई की लोकल ट्रेनों में देखा जाता है। भविष्य में इसे और व्यापक बनाने की तैयारी है।
अक्सर रेल सेवाओं में किल्लत को लेकर हुकूमत पर सवाल उठते रहते हैं, लेकिन पेंडुलम सेवा ने एक सकारात्मक सियासत की मिसाल पेश की है। सीनियर डीसीएम के मुताबिक, यह सेवा उन डेली पैसेंजर्स के लिए मुक्ति का जरिया है जो लंबी दूरी की ट्रेनों में जगह न मिलने के कारण परेशान-हाल रहते थे। अब झाझा, बक्सर और पटना के बीच का सफर सिर्फ सफर नहीं, बल्कि एक सहज अनुभव बन गया है।