जेल में ही कटेगी रातें! 40 मुकदमों के 'सुल्तान' रीतलाल यादव की आजादी पर सस्पेंस खत्म, पटना हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

पटना हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक रीतलाल यादव की जमानत याचिका खारिज की। 40 मुकदमों के इतिहास और रंगदारी-भूमि कब्जा मामले में जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने सख्त फैसला सुनाया ।

जेल में ही कटेगी रातें! 40 मुकदमों के 'सुल्तान' रीतलाल यादव

Patna - : दानापुर के पूर्व विधायक और बाहुबली रीतलाल यादव उर्फ रीतलाल राय को पटना हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। रंगदारी, अवैध भूमि कब्जा और संगठित गिरोह चलाने के गंभीर आरोपों में घिरे पूर्व विधायक की नियमित जमानत याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया है। जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता और आपराधिक इतिहास को देखते हुए राहत देना संभव नहीं है।

संगठित गिरोह और रंगदारी का काला साम्राज्य

रीतलाल यादव के खिलाफ यह मामला खगौल थाना कांड संख्या 171/2025 से जुड़ा है। उन पर रंगदारी के जरिए अवैध धन उगाही, आपराधिक बल का प्रयोग कर निजी और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने तथा एक संगठित अपराधी गिरोह का संचालन करने जैसे संगीन आरोप हैं। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि रीतलाल का प्रभाव क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करता है, जिससे जांच और न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हाई कोर्ट ने सुनी दोनों पक्षों की तीखी बहस

जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। आवेदक की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेन्द्र नारायण ने पक्ष रखते हुए जमानत की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी वकील ने इसका कड़ा विरोध किया। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और पुलिस डायरी में मौजूद साक्ष्यों के आधार पर रीतलाल की अर्जी को नामंजूर कर दिया।

40 मुकदमों का 'क्रिमिनल रिकॉर्ड' बना बाधा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अजय मिश्रा ने कोर्ट को रीतलाल यादव के लंबे आपराधिक इतिहास से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पूर्व विधायक के विरुद्ध विभिन्न थानों में करीब 40 मुकदमें लंबित हैं। इतनी बड़ी संख्या में आपराधिक मामलों की मौजूदगी ने जमानत की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म कर दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसे आदतन अपराधी को बाहर रहने देना समाज के लिए खतरनाक हो सकता है।

जून 2025 से सलाखों के पीछे हैं बाहुबली

रीतलाल यादव इस मामले में 13 जून, 2025 से लगातार जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही उनके समर्थक जमानत के लिए कानूनी प्रयास कर रहे थे, लेकिन हाई कोर्ट के इस कड़े रुख ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फिलहाल उन्हें जेल की सलाखों के पीछे ही वक्त गुजारना होगा।

भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त संदेश

पटना हाई कोर्ट का यह फैसला बिहार में सक्रिय भू-माफियाओं और बाहुबलियों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी और निजी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में अदालतों की सख्ती यह दर्शाती है कि रसूखदार होने के बावजूद कानून के हाथ उन तक पहुँचने से नहीं रुकेंगे।

अगला कानूनी कदम क्या होगा?

हाई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अब रीतलाल यादव के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है। हालांकि, 40 लंबित मुकदमों और रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों के बीच देश की सर्वोच्च अदालत से राहत मिलना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। दानापुर की सियासत और अपराध के गठजोड़ पर इस फैसले का गहरा असर पड़ने की संभावना है।