बिहार में संभावित बाढ़ 2026 को लेकर अलर्ट: सरकार ने कसी कमर, सभी जिलों के डीएम को दिए कड़े निर्देश

बिहार सरकार ने संभावित बाढ़ 2026 को लेकर तैयारी तेज कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने जिलाधिकारियों को नाव, राहत सामग्री और तटबंधों की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

Patna - बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ से निपटने के लिए पूर्व तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है । विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं । सरकार का मुख्य उद्देश्य बाढ़ की विभीषिका को कम करना और ससमय राहत एवं बचाव कार्यों को सुनिश्चित करना है । राज्य के 29 बाढ़ प्रवण जिलों में से 15 जिलों को 'अति बाढ़ प्रवण' की श्रेणी में रखकर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है 

तटबंधों की सुरक्षा और वर्षा मापक यंत्रों की निगरानी

सरकार ने मानसून आने से पूर्व ही सभी संवेदनशील तटबंधों के सुदृढ़ीकरण और मरम्मती का कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया है । इसके लिए जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय कर पेट्रोलिंग टीमें गठित की जाएंगी, जो कटाव या तटबंध काटे जाने की घटनाओं पर नज़र रखेंगी । साथ ही, सभी प्रखंडों में लगे वर्षा मापक यंत्रों (AWS) को चालू हालत में रखने और डेटा के त्वरित प्रेषण के लिए प्रत्येक प्रखंड में दो प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है 

राहत सामग्रियों की दर निर्धारण और नावों का प्रबंधन

राहत कार्यों में देरी न हो, इसके लिए विभाग ने 15 मई 2026 तक चावल, दाल, चूड़ा, गुड़ और पॉलीथीन शीट्स जैसी सामग्रियों के लिए निविदा के माध्यम से दर निर्धारण (Rate Contract) प्रक्रिया पूरी करने का समय तय किया है । आवागमन सुगम बनाने के लिए सरकारी और निजी देशी नावों की मरम्मती और उनके मालिकों के साथ एकरारनामा करने के निर्देश दिए गए हैं । नावों और नाविकों के पुराने बकाये का भुगतान भी जल्द से जल्द करने को कहा गया है 

बाढ़ शरण स्थलों पर सुविधाओं और मेडिकल कैंप का जाल

बाढ़ के दौरान विस्थापित होने वाले लोगों के लिए ऊँचे स्थानों पर स्कूल और पंचायत भवनों को शरण स्थल के रूप में चिन्हित किया जा रहा है । इन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, बिजली और मेडिकल कैंप की समुचित व्यवस्था होगी । बड़े शरण स्थलों पर स्थायी मेडिकल कैंप और अन्य क्षेत्रों के लिए मोबाइल मेडिकल टीमों का गठन किया जाएगा । इसके अलावा, सामुदायिक रसोई (Community Kitchen) के संचालन के लिए भी कर्मियों को पहले से चिन्हित किया जा रहा है 

कर्मियों का डेटाबेस और प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' की तैनाती

सुरक्षा और राहत कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवकों, गोताखोरों, मोटरबोट चालकों और 'आपदा मित्रों' की सूची मोबाइल नंबर के साथ तैयार रखने का निर्देश दिया गया है । जिला स्तर पर 'जिला आपातकालीन संचालन केंद्र' (DEOC) को 24X7 आधार पर संचालित किया जाएगा । इसके अलावा, संकटग्रस्त समूहों जैसे दिव्यांगों, बीमारों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की अलग से सूची तैयार की जा रही है ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर राहत पहुँचाई जा सके 

पशु चारा और आकस्मिक फसल योजना पर विशेष ध्यान

बाढ़ केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि पशुओं और खेती को भी प्रभावित करती है । इसके लिए जिला पशुपालन अधिकारियों को पशु चिकित्सा शिविर और पर्याप्त चारे का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं । कृषि विभाग को 'आकस्मिक फसल योजना' तैयार करने को कहा गया है, ताकि फसल क्षति की स्थिति में किसानों को बिचड़े और वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराए जा सकें । विभाग ने साफ किया है कि इन तैयारियों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी