SIR विवाद के बीच EC का बड़ा फैसला, Form 6 से हटाई गई अभिभावकों की मैपिंग वाली शर्त

नई मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन भरे जाने वाले Form 6 को लेकर चुनाव आयोग ने अपना फैसला बदल दिया है। नई मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन भरे जाने वाले Form 6 को लेकर चुनाव आयोग ने अपना फैसला बदल दिया है।

EC Revises Form 6 Rules- फोटो : news4nation

SIR :  नई मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन भरे जाने वाले Form 6 को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने Form 6 को उसके मूल स्वरूप में बहाल कर दिया है। अब सभी राज्यों में नए मतदाताओं को फॉर्म भरते समय माता-पिता या दादा-दादी के नाम को पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मतदाता सूची से जोड़ने वाली घोषणा देना अनिवार्य नहीं होगा। 


हालांकि, जिन राज्यों में फिलहाल Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया चल रही है, वहां अलग से घोषणा पत्र भरना होगा। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध Form 6 की जांच में यह घोषणा पत्र केवल उन 13 राज्यों के लिए दिखाई दे रहा है, जहां SIR की प्रक्रिया जारी है।


दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति

Form 6 के साथ जोड़े गए इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। दोनों ने सवाल उठाया था कि ऑनलाइन Form 6 जमा करने के लिए आवेदकों को अतिरिक्त घोषणा पत्र भरना जरूरी करना कानूनी रूप से उचित है या नहीं।


उनका तर्क था कि Form 6, Registration of Electors Rules, 1960 का हिस्सा है। ऐसे में आयोग अपने स्तर पर इसमें ऐसा बदलाव नहीं कर सकता, जिसके लिए नियमों में कोई वैधानिक प्रावधान मौजूद न हो। खास तौर पर माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी को पिछली SIR सूची से जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे।


 बैठक में लिया गया फैसला

इन आपत्तियों के बीच शनिवार को पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि अलग से घोषणा पत्र का इस्तेमाल केवल उन्हीं राज्यों में किया जाएगा, जहां SIR चल रहा है। इस फैसले का मतलब है कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या अभी शुरू नहीं हुई है, वहां नए मतदाताओं को अपने या अपने माता-पिता के नाम को पिछली SIR मतदाता सूची से मैप करने की जरूरत नहीं होगी।


बिहार से शुरू हुआ था विवाद

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, Form 6 के साथ अलग घोषणा पत्र जोड़ने की व्यवस्था पहली बार बिहार में SIR शुरू किए जाने के दौरान लागू की गई थी। इसके बाद SIR के दूसरे और तीसरे चरण में भी इसका इस्तेमाल किया गया। आयोग का कहना था कि इस व्यवस्था को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त थी। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और कानूनी सवाल भी उठे। पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले ने RTI के जरिए इस मामले में कानून मंत्रालय से जानकारी मांगी थी।


RTI में उन्होंने पूछा था कि क्या चुनाव आयोग ने Form 6 या Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन के लिए कोई प्रस्ताव कानून मंत्रालय को भेजा है, ताकि SIR से जुड़ी घोषणा या आवेदक के माता-पिता और दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड को इसमें शामिल किया जा सके। कानून मंत्रालय के विधायी विभाग ने जवाब दिया कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।


इसके बाद Form 6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर सवाल और तेज हो गए। अब आयोग के ताजा फैसले के बाद यह व्यवस्था SIR वाले राज्यों तक सीमित कर दी गई है।