एक्सक्यूटिव इंजीनियर पर EOU का शिकंजा: आय से 62% अधिक संपत्ति मिली, भाई के नाम पर चला रहे थे गैस एजेंसी

मधुबनी के जयनगर में तैनात बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के 07 ठिकानों पर ईओयू ने छापेमारी की है । जांच में आय से 62% अधिक संपत्ति, करोड़ों की जमीन के कागजात और नेपाल में आलीशान मकान बनाने के सबूत मिले हैं ।

Patna -  बिहार पुलिस के आर्थिक अपराध प्रभाग (EOU) ने जयनगर (मधुबनी) स्थित NBPDCL के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है । भ्रष्टाचार के माध्यम से ज्ञात आय से 62.66% अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में विभाग ने 16 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया । इस मामले में उनके भाई संजय रजक को भी सह-अभियुक्त बनाया गया है । 

एक साथ 07 ठिकानों पर छापेमारी

निगरानी न्यायालय, मुजफ्फरपुर से तलाशी वारंट प्राप्त कर 17 मार्च 2026 की सुबह से ही अभियंता के दरभंगा, जयनगर, निर्मली और करजाईन (सुपौल) स्थित कुल 07 आवासीय और व्यावसायिक ठिकानो पर एक साथ छापेमारी शुरू की गई 

करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा

अब तक की तलाशी में भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं:

  • नकदी और बैंक बैलेंस: तलाशी के दौरान 1,05,000 रुपये नकद , बैंकों में जमा 4.25 लाख रुपये और करीब 18 लाख रुपये मूल्य के दो वाहन (स्विफ्ट डिजायर और स्कॉर्पियो) बरामद हुए हैं 

    जमीन के दस्तावेज: अररिया, सुपौल, दरभंगा और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में जमीन के कुल 17 दस्तावेज मिले हैं, जिनका बाजार मूल्य 3 करोड़ रुपये से अधिक है । निबंधित मूल्य करीब 1 करोड़ रुपये बताया जा रहा है 

    भाई के नाम पर गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप की तैयारी

जांच में यह भी सामने आया कि मनोज कुमार रजक अपने भाई संजय रजक के नाम पर 'इन्जीनियर एच.पी. गैस ग्रामीण वितरक' नाम से एजेंसी चला रहे थे । हैरानी की बात यह है कि एजेंसी के नाम पर खरीदी गई स्कॉर्पियो को वे अपने ही कार्यालय में सरकारी कार्य में प्रयुक्त दिखाकर किराया भी वसूल रहे थे । इसके अलावा, दरभंगा-विरौल पथ पर पत्नी के नाम पर पेट्रोल पंप खोलने के लिए लीज पर ली गई जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं।

नेपाल में भी घर का निर्माण

EOU को साक्ष्य मिले हैं कि श्री रजक नेपाल के सुनसरी जिला (ग्राम-हरिपुर) में अपनी एक रिश्तेदार के नाम पर घर का निर्माण करा रहे हैं, जिसके लिए मजदूर अपने पैतृक गांव से भेजे जाते थे। विभाग अब इनकी अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कर रहा है, जिनकी घोषणा उन्होंने अपनी वार्षिक संपत्ति रिपोर्ट में नहीं की थी।