पटना में गंगा का कहर,मोकामा में पांच किलोमीटर सड़क दरककर हुई ध्वस्त,सभी रास्ते हो गए हैं बंद

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने रविवार की रात ऐसा कहर बरपाया कि पटना के मोकामा की 5 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा तेज धार की जद में आकर बह गया।....

मोकामा में गंगा का कहर- फोटो : reporter

Patna:  जिले के मोकामा प्रखंड में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने रविवार की रात ऐसा कहर बरपाया कि कसहा दियारा पंचायत की करीब 5 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा तेज धार की जद में आकर बह गया। सड़क के ढहते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हजारों लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया। जिस सड़क के सहारे पंचायत के लोग पटना से बेगूसराय जिले और पंचायत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचते थे, वही सड़क अब गंगा की लहरों में समा गई है।

सड़क के ध्वस्त होने से गांवों की रफ्तार पर मानो ब्रेक लग गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क का हिस्सा बह जाने के बाद रोजमर्रा के कामकाज, जरूरी आवाजाही और आपसी संपर्क पर सीधा असर पड़ा है। कई इलाकों के लोगों के लिए यह रास्ता महज सड़क नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की अहम कड़ी था। अब रास्ता टूटने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इस सड़क के निर्माण पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। लोगों का सवाल है कि करोड़ों की लागत से बनी सड़क आखिर कुछ वर्षों तक भी टिक क्यों नहीं सकी? गंगा की तेज धार ने सड़क की गुणवत्ता और निर्माण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की सुरक्षा और कटाव रोकने के इंतजाम किए जाते, तो शायद हालात इतने बदतर नहीं होते

उधर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से सिमरिया धाम का निषाद घाट भी जलमग्न हो गया है। घाट पर निर्भर सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। निषाद समुदाय और अन्य स्थानीय लोगों की आजीविका का बड़ा हिस्सा गंगा और घाट से जुड़ा है। पानी बढ़ने के साथ कामकाज प्रभावित होने से परिवारों के सामने आर्थिक परेशानी गहराने लगी है।

बाढ़ और कटाव की यह तस्वीर एक बार फिर दियारा इलाके की बदहाल व्यवस्था को सामने लाती है। एक तरफ गंगा का उफनता पानी और दूसरी तरफ टूटी सड़क—दोनों ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोगों को अब प्रशासन से तत्काल राहत, वैकल्पिक आवागमन और कटावरोधी उपायों की दरकार है।करोड़ों की लागत से बनी सड़क का यूं गंगा की धार में बह जाना सिर्फ एक रास्ते का टूटना नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और बाढ़ से निपटने की तैयारियों पर भी गंभीर सवालिया निशान है। ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन की कार्रवाई और इस संकट से निकलने के इंतजाम पर टिकी है।

रिपोर्ट-प्रियदर्शन शर्मा