जेल से रिहा होंगे पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह ! विधायक देवेश कांत सिंह ने विधानसभा में शुरू की पहल, दोहरे हत्याकांड में सजा काट रहे हैं MP

सारण जिले के मशरख ब्लॉक के पास वर्ष 1995 में हुए डबल मर्डर मामले में सजा काट रहे प्रभुनाथ सिंह की रिहाई के लिए गोरेयाकोठी विधायक देवेश कांत सिंह ने पहल की है.

Former MP Prabhunath Singh/MLA Devesh Kant Singh- फोटो : news4nation

Prabhunath Singh : गोरेयाकोठी विधानसभा क्षेत्र के विधायक देवेश कांत सिंह ने मशरख के पूर्व विधायक एवं महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की रिहाई की मांग को लेकर बिहार विधानसभा में तारांकित प्रश्न दाखिल किया है। विधायक ने 73 वर्षीय प्रभुनाथ सिंह को स्वास्थ्य कारणों से रिहा करने की मांग की है।


विधायक देवेश कांत सिंह ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने चुनाव प्रचार के समय जनता से वादा किया था कि चुनाव के बाद पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की रिहाई के लिए विधानसभा में प्रश्न उठाएंगे। उन्होंने बताया कि अपने वादे के अनुरूप बिहार विधान सभा के मौजूदा बजट सत्र में तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से मांग की गई है कि चिकित्सकों की सलाह के अनुसार, स्वास्थ्य आधार पर प्रभुनाथ सिंह की रिहाई सुनिश्चित की जाए।


2017 से हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद

गौरतलब है कि प्रभुनाथ सिंह वर्ष 1995 के मशरख डबल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और 23 मई 2017 से हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि विधायक ने कहा कि उम्र बढ़ने के कारण उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, ऐसे में जेल मैनुअल एवं विधिक नियमों में आवश्यक बदलाव कर उन्हें रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए। देवेश कांत सिंह ने कहा कि प्रश्न की स्वीकृति मिलने के बाद तय तिथि को सदन में इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि नकारात्मक दुष्प्रचार से बचें और भरोसा रखें कि उन्होंने अपने स्तर से वादे को पूरा करने का प्रयास किया है


क्या हुआ था?

1995 में बिहार के सारण जिले के मशरख ब्लॉक के पास एक मतदान केंद्र के पास दो व्यक्तियों — 47 वर्षीय दारोगा राय और 18 वर्षीय राजेंद्र राय — की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने उस समय मतदान के दौरान पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के समर्थित उम्मीदवार को वोट नहीं दिया था। तभी प्रभुनाथ सिंह के कहे अनुसार उन दोनों को गोली मारी गई थी।


सुप्रीम कोर्ट से मिली सजा 

निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में प्रभुनाथ सिंह को बरी कर दिया था। इसके बाद पटना हाईकोर्ट (2021) ने भी उस रिहाई को बरकरार रखा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द करते हुए प्रभुनाथ सिंह को दोषी करार दिया। उन्हें आजीवन कारावास (लाइफ इम्प्रिजनमेंट) की सजा सुनाई गई। साथ ही मृतक के परिवारों को 10-10 लाख और घायल को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया।