भ्रष्ट तंत्र का इनाम! गया में अवैध वसूली में जेल गए ESI गौरव कुमार की 27 दिन में बहाली; नियम ताक पर

Patna - बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। गया जिले में अवैध वसूली और मारपीट के गंभीर मामले में गिरफ्तार हुए प्रवर्तन अवर निरीक्षक (ESI) गौरव कुमार का निलंबन महज 27 दिनों के भीतर ही समाप्त कर दिया गया है। जेल से बाहर आते ही आरोपी अधिकारी को फिर से बहाल किए जाने के फैसले ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

अवैध वसूली का 'खेल' और जेल की हवा


बीते 23 दिसंबर 2025 को गया के कोंच थाना क्षेत्र में एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ईएसआई गौरव कुमार और उनके दो निजी साथियों ने प्याज लदी दो पिकअप गाड़ियों को रोककर अवैध वसूली की कोशिश की । आरोप था कि बिना डीटीओ (DTO) को सूचना दिए, निजी स्कॉर्पियो से रात में निकलकर गौरव कुमार ओवरलोडिंग के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे । विरोध करने पर पीड़ित के साथ मारपीट की गई और उसके पैसे व मोबाइल छीन लिए गए । एसएसपी के निर्देश पर हुई त्वरित कार्रवाई में गौरव कुमार को उनके दो साथियों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था 

भ्रष्टाचार पर नरम पड़ा परिवहन विभाग

गौरव कुमार के विरुद्ध आईपीसी और अब की नई धाराओं के तहत गंभीर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें धोखाधड़ी, मारपीट और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं शामिल थीं । परिवहन विभाग ने 24 दिसंबर 2025 को उन्हें निलंबित तो किया, लेकिन यह अनुशासन का डंडा एक महीना भी नहीं टिक सका । 16 जनवरी 2026 को जमानत पर रिहा होते ही गौरव कुमार ने 19 जनवरी को विभाग में अपना योगदान समर्पित कर दिया, जिसे विभाग ने अब आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है 

सिस्टम की जवाबदेही पर उठते सवाल

ईएसआई गौरव कुमार के निलंबन को समाप्त करने का आदेश अपर सचिव द्वारा जारी किया गया है, जिस पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन भी प्राप्त है । यह आदेश 10 फरवरी 2026 को निर्गत किया गया । सवाल यह उठता है कि जिस अधिकारी पर ऑन-ड्यूटी डकैती और वसूली जैसे संगीन आरोप हों, उसे इतनी जल्द सेवा में वापस क्यों लिया गया? क्या यह भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को विभाग का मूक समर्थन है?