UGC New Act 2026: UGC के नए नियम पर चुप्पी साधने वाले गिरिराज सिंह को अब आया होश! सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगने के बाद कानून को बताया बांटने वाला...

UGC New Act 2026: यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। जिसके बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस कानून को बांटने वाला कानून बताया है वहीं अब यूजर्स ने उन्हें घेर लिया है, और उनकी चुप्पी पर सवाल खड़ा कर रहे हैं...

गिरिराज सिंह का बड़ा बयान - फोटो : social media

UGC New Act 2026: UGC के नए नियम को लेकर देश में सियासी हलचल सातवें आसमान पर है, इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर स्टे लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगने के बाद अब इस मामले में पहली बार बिहार से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बयान दिया। गिरिराज सिंह अब इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है और इस कानून को सनातन को बांटने वाला नियम बनाया है। वहीं गिरिराज के ट्विट करते ही यूजर्स ने उन्हें खेर लिया है। यूजर्स का कहना है कि जब कानून तब तो विरोध में एक शब्द भी नहीं बोले और अब मुंह खोला है। गिरिराज सिंह अब अपने ही बयान पर घिरते नजर आ रहे हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे 

दरअसल, यूजीसी के नए नियम को लेकर देशभर में लगातार बवाल हो रहा था, लेकिन बिहार के तमाम नेताओं ने इस मामले में चुप्पी साध रखी थी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह आज सुबह पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे तो पत्रकारों ने उनसे सवाल किया, तब भी वो वहां से चुप-चाप निकल जाना ही उचित समझे। वहीं गिरिराज सिंह भी अब तक इस मामले में चुप थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगने के बाद उन्होंने कानून को बांटने वाला कानून बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय का आभार जताया है।  

सनातन को बांटने वाला नियम?

गिरिराज सिंह ने कहा है कि,  "सनातन को बाँटने वाले यूजीसी के नियम पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता की है"।

अपने ही बयान से घिरे गिरिराज 

वहीं अब गिरिराज सिंह के इस बयान पर जमकर विरोध हो रहा है। यूजर्स उनसे सवाल कर रहे हैं कि पहले वो इस मामले पर चुप क्यों थे? सब सवाल कर रहे हैं कि पहले क्यों चुप थे? गौरतलब हो कि, देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस नियमावली पर फिलहाल अंतरिम रोक लगाते हुए सख्त लहजे में कहा है कि इसके जरिए बराबरी की आड़ में भेदभाव का अपराध अंजाम दिया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने इस मसले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए साफ संकेत दिया कि मामला सिर्फ नीतियों का नहीं, बल्कि संविधान की रूह से जुड़ा है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब भी किया है।