विश्व टीबी दिवस 2026: 'हाँ! हम टीबी खत्म कर सकते हैं', डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने बताया - जागरूकता और पूरा इलाज ही है बचाव का रास्ता

विश्व टीबी दिवस की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने टीबी मुक्त समाज का आह्वान किया। उन्होंने समय पर जांच और नियमित दवा को इस बीमारी को जड़ से मिटाने का एकमात्र उपाय बताया।

Patna - विश्व टीबी दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर "पहल" (पब्लिक अवेयरनेस फॉर हेल्थफुल एपरोच फॉर लिविंग) के चिकित्सा निदेशक और प्रख्यात चिकित्सक डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने जनता के नाम महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी (क्षय रोग) भले ही एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। सही समय पर पहचान और बिना रुके पूरा उपचार लेने से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

वर्ष 2026 की थीम: "प्रतिबद्धता, निवेश और परिणाम"

इस वर्ष विश्व टीबी दिवस की थीम “Yes! We Can End TB: Commit, Invest, Deliver” (हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं—प्रतिबद्धता, निवेश और परिणाम) रखी गई है। डॉ. तेजस्वी के अनुसार, भारत में टीबी आज भी एक बड़ी चुनौती है, लेकिन वैश्विक प्रतिबद्धता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए इसे जड़ से मिटाया जा सकता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉ. तेजस्वी ने टीबी के प्रमुख लक्षणों के प्रति आगाह किया है। यदि आपको या आपके आसपास किसी को निम्नलिखित शिकायतें हैं, तो तुरंत जांच कराएं:

  • लगातार 2 सप्ताह से अधिक खांसी होना।

  • खांसी के साथ खून आना।

  • बिना कारण तेजी से वजन घटना

  • शाम के समय बुखार आना और रात में पसीना आना।

  • अत्यधिक कमजोरी और भूख में कमी महसूस होना।


  • इलाज के दौरान 'ड्रग-रेसिस्टेंट' टीबी का खतरा

उपचार के संबंध में डॉ. तेजस्वी ने एक कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि टीबी का इलाज आमतौर पर 6 से 9 महीने तक चलता है। कई मरीज थोड़ा ठीक महसूस करने पर बीच में ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे 'ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी' का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति और भी घातक होती है क्योंकि इसमें सामान्य दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सरकारी और निजी केंद्रों पर टीबी का इलाज और जांच की सुविधाएं व्यापक रूप से उपलब्ध हैं।

सामाजिक भ्रांतियों और कलंक पर प्रहार

बीमारी से ज्यादा डॉ. तेजस्वी ने समाज में फैली भ्रांतियों (स्टिग्मा) को खतरनाक बताया। उन्होंने कहा, "टीबी छुपाने की नहीं, बल्कि खुलकर जांच कराने वाली बीमारी है।" समाज को टीबी मरीजों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए ताकि वे बिना किसी संकोच के अपना इलाज पूरा कर सकें। बच्चों को BCG टीकाकरण कराना और पौष्टिक आहार के जरिए इम्युनिटी मजबूत रखना ही इस लड़ाई में सबसे बड़े हथियार हैं।