प्रवासी मजदूरों के शव को घर पहुंचाने के मुद्दे पर बिहार विधानसभा में भारी हंगामा, डिप्टी सीएम का बड़ा ऐलान

अख्तरुल ईमान ने कहा कि जरूरत पड़े तो विधायकों का वेतन रोक दिया जाए, लेकिन मजदूरों के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

Bihar Assembly- फोटो : news4nation

Bihar Assembly : बिहार विधान सभा में बुधवार को प्रवासी मजदूरों की कार्यस्थल पर मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर को पैतृक घर तक पहुंचाने के प्रश्न पर सदन में जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि राज्य के बाहर या विदेश में कार्यरत असंगठित क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों की दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में उनके पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक पहुंचाने में हुए खर्च का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को स्पष्ट करने और प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की।


इस पर मंत्री संजय टाइगर ने जवाब देते हुए कहा कि स्वाभाविक मृत्यु की स्थिति में मृत प्रवासी श्रमिकों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक आवास तक पहुंचाने का विभागीय स्तर पर कोई प्रावधान नहीं है। मंत्री के इस उत्तर के बाद विपक्षी सदस्य आक्रोशित हो उठे।


अख्तरुल ईमान ने कहा कि जरूरत पड़े तो विधायकों का वेतन रोक दिया जाए, लेकिन मजदूरों के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वहीं राजद विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के समय वोट के लिए ट्रेन चलाती है, लेकिन मजदूरों की डेडबॉडी को घर पहुंचाने में संवेदनशीलता नहीं दिखाती।


स्थिति को संभालने के लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार ने इस मुद्दे से इंकार नहीं किया है और भविष्य में इस पर विचार किया जाएगा। इसके बाद राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने पूछा कि अब तक इस योजना के तहत कितने लोगों को लाभ दिया गया है। सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस मद में 2,58,546 रुपये खर्च किए गए हैं। 


सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत संतोष मरांडी (पूर्णिया), कुनाल कुमार, राजू लाल, बीपी लाल शाह (गोपालगंज) और घनश्याम (गोपालगंज) को लाभ प्रदान किया गया है। मामले को लेकर सदन में देर तक शोर-शराबा जारी रहा और स्पष्ट नीति बनाने की मांग उठती रही।

रंजन की रिपोर्ट