विधान परिषद में स्वास्थ्य, न्यायिक सुविधाओं और पेयजल व्यवस्था पर सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने नीतीश सरकार को घेरा

Bihar Legislative Council- फोटो : news4nation

Bihar Vidhan Parishad : बिहार विधान परिषद में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने स्वास्थ्य सेवाओं, न्यायिक बुनियादी ढांचे, बायो-मेडिकल कचरा निष्पादन और पेयजल योजनाओं से जुड़े मुद्दे उठाए। इन सवालों पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई और संबंधित मंत्रियों ने जवाब दिया। सदस्यों ने राजेंद्र नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की खराब स्थिति का मामला उठाया। बताया गया कि 30 बेड का ऑपरेशन थियेटर और डिलीवरी रूम तैयार होने के बावजूद न तो नियमित डिलीवरी हो रही है और न ही इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह संचालित हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ और एक्स-रे टेक्नीशियन की कमी की भी बात कही गई।


इस पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जवाब देते हुए कहा कि करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल में नेत्र रोग के विशेष इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि समीप ही पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) और नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। डॉक्टरों और कर्मियों के कार्यों की समीक्षा की जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।


मंत्री ने कहा कि 20 वर्ष पूर्व यदि पीएमसीएच और एनएमसीएच की स्थिति सुधारी गई होती तो हालात अलग होते। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राजद शासनकाल में पीएमसीएच जैसे 1925 में स्थापित प्रीमियम संस्थान की स्थिति खराब हुई। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि राजेंद्र नगर में इलाज प्रभावित होने की शिकायत सही पाई गई तो जांच कराई जाएगी।


नवादा सिविल कोर्ट में अधिवक्ता भवन की मांग

परिषद सदस्य आशिक कुमार ने नवादा सिविल कोर्ट परिसर में अधिवक्ता भवन नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वकीलों को न्यायालय परिसर के बाहर तंबू लगाकर काम करना पड़ता है। इस पर मंत्री मंगल पांडेय ने अधिवक्ता भवन निर्माण का आश्वासन दिया।


बायो-मेडिकल कचरे का निष्पादन

एमएलसी महेश्वर सिंह ने राज्य में मेडिकल कचरे के सुरक्षित निष्पादन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतिदिन करीब 26 हजार किलोग्राम बायो-मेडिकल कचरा निकलता है, जो अत्यंत खतरनाक है। आरोप लगाया गया कि कुछ अस्पतालों द्वारा कचरा बाहर फेंका जा रहा है। मंत्री ने बताया कि पूरे बिहार को चार जोन में बांटकर बायो-मेडिकल कचरा निष्पादन केंद्र स्थापित किए गए हैं और इन्हीं केंद्रों पर कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर और केंद्र खोलने पर विचार किया जाएगा।


नल-जल और चापाकल योजना पर सवाल

सदन में नल-जल योजना और चापाकलों के फेल होने का मुद्दा भी उठा। सदस्यों ने कहा कि बड़े जिलों में कई चापाकल खराब पड़े हैं और उनकी मॉनिटरिंग पंचायत स्तर पर दी जानी चाहिए। विभागीय जिम्मेदारी बंटने से समस्या बढ़ने की बात कही गई। इस पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) की ओर से मंत्री संजय सिंह ने कहा कि दो विभागों के बीच जिम्मेदारी बंटने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि कार्य की जिम्मेदारी किसी एक विभाग—चाहे PHED हो या पंचायती राज—को स्पष्ट रूप से सौंपी जानी चाहिए, ताकि निगरानी और क्रियान्वयन बेहतर ढंग से हो सके।


प्रश्नकाल के दौरान उठे इन मुद्दों पर सरकार ने समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

अभिजीत की रिपोट