Bihar News : पटना हाईकोर्ट का अहम् फैसला, कहा – दुष्कर्म की कोशिश के लिए गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं, ठोस सबूत जरूरी

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को बलात्कार के प्रयास के आरोप में दोषी ठहराने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत होना पर्याप्त नहीं है....पढ़िए आगे

ठोस सबूत पर कार्रवाई - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को रेप कोशिश करने को दोषी ठहराते केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त  नहीं हैं,बल्कि ऐसे ठोस सबूत होने चाहिए। जस्टिस संदीप कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कहा कि रेप की कोशिश करना और अश्लील आपत्तिजनक  हरकतों के बीच अन्तर  जरूरी हैं।कोर्ट ने इसे लज्जा भंग का मामला माना हैं। ये मामला बेगूसराय जिले से सम्बन्धित है। इसमें 8 फरवरी,2010  को एक विधवा महिला जब अपने बच्चे के साथ घर  में  सोई थी। आरोप  हैं कि एक अधेड़ पड़ोसी उस पर गंदी नजर रखता था। उस दिन रात के दस बजे बह उसके घर  में जबरदस्ती घुस कर दीया बुझा दिया और उसके उपर लेट गया। वह महिला जब चिल्लाने लगी,तो गांव के लोग आ गये। उन्होंने उस अधेड़ की पिटाई कर दी। गांव वालों ने आश्वासन दिया कि पंचायती में इस मामलें ले जाया जायेगा। लेकिन वह व्यक्ति  पंचायती में नहीं आया। इसके बाद वह महिला संबंधित पुलिस स्टेशन एफआईआर दर्ज कराने गयी,पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं  किया।

उसके बाद वह सीजेएम कोर्ट में घटना के दो दिन बाद गई। कोर्ट ने शिकायत  को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पुलिस के पास  भेजा,जिसके बाद बलिया पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ। पुलिस ने जांच के बाद रेप की कोशिश के आरोप में चार्जशीट दायर किया। आईपीसी की धारा 376 के साथ  धारा 511( रेप की कोशिश) और धारा 448 के तहत आरोप तय किया। ट्रायल कोर्ट ने  रेप की कोशिश के लिए  चार साल  सश्रम कारावास  और घर में जबरन घुसने के लिए  छः माह की सश्रम  कारावास की सजा सुनाई। इस आदेश को पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई। जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई की। कोर्ट  ने कहा कि किसी व्यक्ति को रेप की कोशिश ठहराने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए ठोस सबूत होने चाहिए। कोर्ट ने माना कि घर में आरोपी की मौजूदगी साबित हुआ हैं। महिला ने आरोपी को अपने घर  में देखने,उसकी हरकतों के बारे में स्पष्ट और लगातार बयान दिया हैं। आरोपी उसी गांव का था और उसे वह पहचानती हैं। उसके शोर मचाने पर गांव वालों ने आरोपी को पकड़ लिया। कोर्ट ने पड़ोसी की गवाही को महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी के घटनास्थल पर मौजूदगी को लेकर पडोसियों से बहस नहीं की गई। ये भी नहीं कहा गया कि महिला या पडोसी से दुश्मनी  के कारण झूठे मामलें में फंसाया गया। आरोपी ने भी दस बजे रात में घर के अंदर होने का स्पष्टीकरण नही  दिया। इसलिए कोर्ट ने माना कि घटना के समय आरोपी की घर में  मौजूदगी साबित होती हैं। आरोपी के अधिवक्ता की ओर से एफआईआर दर्ज कराने में हुई विलम्ब का मुद्दा लाया गया। कोर्ट  ने इसे यह कह कर नकार दिया कि सामाजिक परिस्थिति,महिलाएं ऐसे मामलों  संकोच ,शर्म, लज्जा करना देरी का कारण हो सकता हैं। कोर्ट  ने यह भी स्पष्ट किया  कि जांच अधिकारी की गवाही कोई जरूरत नहीं हैं,यदि उपलब्ध गवाहों की विश्वसनीय गवाही से जरुरी तथ्य साबित हो रहे हो,तो अतिरिक्त गवाह को प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हो,तो उसी के बयान पर सजा सुनाई जा सकती हैं। कोर्ट ने महिला की गवाही के मुख्य हिस्से को स्वीकार किया। कोर्ट  ने ये भी ध्यान  दिया कि प्रारम्भ में रेप का आरोप था,जबकि पुलिस ने रेप की कोशिश के मामलें में  चार्जशीट दायर किया था। कोर्ट ने कहा कि रेप की कोशिश करना और अश्लील आपत्तिजनक हरकत के बीच में  अंतर होता हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल तैयारी करना और अपराध को अंजाम देने का कार्य करना अलग-अलग स्थिति  हैं। हाईकोर्ट ने महिला  और पडोसियों की गवाही आरोपी की मौजूदगी साबित करने के लिए पर्याप्त  हैं। जांच अधिकारी की गवाही नहीं होने के कारण आरोपी को कोई नुकसान नहीं हुआ, जो कि आरोपी के मौजूदगी के सबूत को कमजोर कर दे। कोर्ट ने कहा कि अगर  पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हैं,तो उसके बयान पर सजा सुनाई जा सकती हैं। कोर्ट ने महिला के गवाही मुख्य हिस्से स्वीकार किए, जैसे आरोपी का घर  में जबरन घुसने,दीया बुझाना,उसके उपर लेटना,उसका मुंह बंद करना आदि। लेकिन रेप की कोशिश के लिए जरुरी कार्रवाई के बारे में महिला के बयान में एकरुपता नहीं थी। न ही दूसरे सबूतों से पुष्टि हुई। कोर्ट ने माना कि आरोपी हरकतें मर्यादा भंग करने वाली थी। हाईकोर्ट ने रेप करने की कोशिश की सजा रद्द कर दी,लेकिन घर में घुसने के मामलें में अपराधी करार दिया। कोर्ट ने दोनों अपराधों में सजा घटाकर  अबतक जेल में बिताये गये अवधि कर दिया। साथ ही पच्चीस हज़ार  का जुर्माना लगाया, जिसे मुआवजा के रूप  में पीड़िता को दिया जाएगा।