संसद में गूंजा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी का मुद्दा, राजद सांसद संजय यादव ने उठाया बड़ा सवाल

संजय यादव ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा का मूल उद्देश्य बीमारी के समय नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा देना है, न कि जटिल नियमों के जरिए उन्हें परेशान करना।

RJD MP Sanjay Yadav- फोटो : news4nation

Sanjay Yadav : राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव ने ने शुक्रवार को संसद में स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए क्लेम के समय होने वाली कटौतियों और कथित मनमानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य बीमा कंपनियों का वार्षिक प्रीमियम संग्रह लगभग 3 लाख 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन जब मरीज अस्पताल का बिल जमा कर बीमा क्लेम करता है, तो कंपनियां विभिन्न तकनीकी नियमों और प्रावधानों का हवाला देकर बड़ी राशि काट लेती हैं।


संजय यादव ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा का मूल उद्देश्य बीमारी के समय नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा देना है, न कि जटिल नियमों के जरिए उन्हें परेशान करना। उन्होंने बताया कि यदि बीमा पॉलिसी में कमरे की सीमा तय होती है और मरीज उससे महंगे कमरे में भर्ती हो जाता है, तो केवल कमरे के किराये का अंतर ही नहीं बल्कि पूरे अस्पताल बिल पर अनुपातिक कटौती (प्रोपोर्शनट डिडक्शन) कर दी जाती है।


उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल के बिल में शामिल कई जरूरी चिकित्सा वस्तुएं जैसे ग्लव्स, डिस्पोजेबल आइटम, सैनिटाइजर और कुछ इंजेक्शन को “नॉन-पेयेबल” बताकर क्लेम से बाहर कर दिया जाता है। इसके अलावा कई मामलों में थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर या पैकेज रेट के आधार पर भी कटौती की जाती है, जिससे मरीज को पूरा भुगतान नहीं मिल पाता।


संजय यादव ने सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में अनुपातिक कटौती की व्यवस्था खत्म की जाए और अस्पताल बिल में शामिल आवश्यक चिकित्सा वस्तुओं को नॉन-पेयेबल सूची से हटाया जाए। साथ ही पॉलिसी के नियम सरल हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध कराने, डिस्चार्ज के समय पारदर्शी डिजिटल क्लेम ब्रेकअप लागू करने और उपभोक्ताओं के हित में सुधार करने की भी मांग की।


उन्होंने कहा कि देश में चिकित्सा महंगाई 12–14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि सामान्य महंगाई लगभग 5–6 प्रतिशत है। ऐसे में क्लेम रिजेक्शन या कटौती के कारण मरीजों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। सांसद ने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक नीतिगत कदम उठाने का आग्रह किया।

रंजन की रिपोर्ट