पटना स्नातक MLC चुनाव: जन सुराज प्रत्याशी डॉ अनुज सिंह का पार्टी के भीतर ही विरोध, प्रियदर्शी पीयूष ने अनंत सिंह के समर्थन पर उठाए सवाल

पटना स्नातक MLC चुनाव: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी घोषित किए गए डॉ अनुज सिंह का पार्टी के भीतर ही तीखा विरोध शुरू हो गया है........पढ़िए आगे

अनुज का विरोध - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी घोषित किए गए डॉ अनुज सिंह का पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है। अनुज सिंह को मोकामा के जदयू विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह का समर्थन प्राप्त है। अनुज सिंह का विरोध वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोकामा विधानसभा क्षेत्र से प्रशांत किशोर की पार्टी से प्रत्याशी रहे प्रियदर्शी पीयूष ने किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके डॉक्टर अनुज को समर्थन नहीं देने का ऐलान किया है। साथ ही दुलारचंद यादव की हत्या के आरोपी अनंत सिंह से अनुज सिंह को समर्थन मिलने के बाद भी पीके द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने पर गहरी आपत्ति जताई है। 

प्रियदर्शी पीयूष ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा की पटना स्नातक MLC चुनाव के संदर्भ में मैं अपना स्पष्ट और सिद्धांतगत रुख सार्वजनिक करना आवश्यक समझता हूँ—मैं अनंत सिंह समर्थित जन सुराज उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहा हूँ। मेरा आग्रह है कि प्रत्येक मतदाता अपने विवेक, राजनीतिक मूल्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सोच-समझकर अपने मत का प्रयोग करे। जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह अपनी नीतियों और वैचारिक प्रतिबद्धताओं को दरकिनार कर उसी पुराने बाहुबल की बैसाखी के सहारे चुनावी मैदान में खड़े हैं।

उन्होंने कहा की आप सभी को याद होगा कि विगत विधानसभा चुनाव के दौरान हमारे काफिले पर हमला हुआ था और हमारे तथा अनंत सिंह के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी। इस पूरे घटनाक्रम में हमारे अभिभावक तुल्य दुलारचंद यादव जी की हत्या हुई थी। इस मामले में हमारी ओर से अनंत सिंह और उनके सहयोगियों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मोकामा के वर्तमान विधायक का राजनीतिक स्वभाव और उनकी कार्यशैली कैसी रही है, यह केवल मैं ही नहीं, बल्कि आप सभी भी भली-भांति जानते हैं। इसके अतिरिक्त, हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज हुए और उन्हें जेल जाना पड़ा। इन मामलों को लेकर भी हमारी कानूनी लड़ाई जारी है।

उन्होंने कहा की कलम, ज्ञान और शिक्षित युवाओं के इस गरिमामय चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी अपराध और बाहुबल की राजनीति के आगे नतमस्तक हो जाए तथा अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताओं से समझौता कर ले, तो वह हमारे शिक्षित समाज का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकता है? ऐसी राजनीति और बाहुबल की संस्कृति का बिहार की सार्वजनिक छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इन परिस्थितियों में मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से उनका समर्थन करना अपने सिद्धांतों और नैतिकता से समझौता करने के समान है, जो मेरे लिए असंभव है। नेतृत्व का काम केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना और सार्वजनिक जीवन में एक नैतिक मानक स्थापित करना भी है। यदि हम स्वयं राजनीतिक लाभ के लिए अनैतिक तत्वों का साथ लेने लगेंगे, तो इसका समाज पर प्रतिकूल और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जो न तो समाजहित में है और न ही सामाजिक एवं राजनीतिक भविष्य के लिए उचित है।

कहा की सभी से आग्रह करता हूँ कि पर्दे के पीछे चल रहे राजनीतिक समीकरणों को समझें, उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर स्वयं विचार करें और किसी भी प्रकार के दबाव या बहकावे में आए बिना बहुत सोच-समझकर अपने मत का प्रयोग करें। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता अपने अभिभावक तुल्य दुलारचंद यादव जी, उनके शोकाकुल परिवार और अपने समर्थकों के प्रति है। इस मामले में मैं किसी भी प्रकार का राजनीतिक समझौता नहीं कर सकता। हम अपने लोगों के लिए कल भी खड़े थे, आज भी खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। आज भी हम दुलारचंद यादव जी के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। आगे भी जनता का साथ रहा तो हम हर मुश्किल का मजबूती से सामना करेंगे और न्याय की इस लड़ाई को पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाएँगे। कहा की मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि भविष्य में हम राजनीति में रहें या न रहें, किसी भी परिस्थिति में ऐसे लोगों या तत्वों के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेंगे, जिनके साथ खड़ा होना हमारी नैतिक प्रतिबद्धताओं के विपरीत हो। हमारे लिए नैतिकता व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रियदर्शन की रिपोर्ट