Bihar Police NH Patrol Vehicle Launch: राष्ट्रीय राजमार्गों पर 58 नए गश्ती वाहन तैनात,डायल 112 से कनेक्टेड
बिहार के मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा सुदृढ़ीकरण हेतु 58 नए NH गश्ती वाहनों को रवाना किया। 4D स्पीड रडार, ई-चालान और डायल 112 एकीकरण से लैस ये वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाने और 'गोल्डन आवर' में आपातकालीन सहायता प्रदान करने में मददगार होंगे।
बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में सड़क सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से द्वितीय चरण के तहत 58 नए राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) गश्ती वाहनों का लोकार्पण किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या में भारी कमी लाना है। यह कदम भारत सरकार के 'Vision-2030' के तहत सड़क दुर्घटना मृत्यु दर को 50% तक कम करने के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
आंकड़ों और पृष्ठभूमि के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 44% मौतें राष्ट्रीय राजमार्गों पर ही घटित होती हैं, जिसका प्रमुख कारण अप्रभावी प्रवर्तन और आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी रहा है। इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने और राजमार्ग गश्ती योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार ने 1560 मानव-बल की स्वीकृति दी है। इससे पूर्व, योजना के प्रथम चरण में राज्य के सर्वाधिक दुर्घटना-प्रवण राजमार्गों पर लगभग 3000 किलोमीटर के दायरे में (प्रत्येक 50 किमी पर एक वाहन) 61 गश्ती वाहनों की तैनाती की जा चुकी है।
तकनीकी दृष्टिकोण से, इन नए गश्ती वाहनों को अत्याधुनिक सुविधाओं और जीवन रक्षक उपकरणों से लैस किया गया है। इनमें तेज रफ्तार और यातायात नियमों के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए 4D स्पीड रडार और 'Evidence Camera' युक्त ऑटोमैटिक ई-चालान की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, किसी भी आपातकालीन दुर्घटना की स्थिति से निपटने के लिए इन वाहनों में गैस कटिंग मशीन, ट्रैफिक कोन, फोल्डेबल स्ट्रेचर और अन्य आवश्यक आपातकालीन उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
इन गश्ती वाहनों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इन्हें सीधे डायल #112 सेवा से एकीकृत (integrate) किया गया है, जिससे दुर्घटना के समय ये वाहन तुरंत 'First Responder' (प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता) के रूप में कार्य कर सकेंगे। यह व्यवस्था दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान कर 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) के भीतर निकटतम अस्पताल पहुँचाने में मदद करेगी। साथ ही, ये वाहन राजमार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखने और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।