पटना बेउर जेल में बड़ा प्रशासनिक विवाद: प्रभार सौंपने के लिए बुलाए गए 5 निलंबित अधिकारियों पर FIR
पटना का बेउर जेल एक बार फिर नए विवाद में घिर गया है। जेल अधीक्षक ने निलंबित अधिकारियों को चार्ज सौंपने के लिए बेउर जेल बुलाया और परिसर में आने पर उन्हीं के खिलाफ सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ और अनधिकृत प्रवेश के आरोप में एफआईआर दर्ज करा दी....
Patna : बिहार की सबसे संवेदनशील बेउर जेल एक बार फिर नए विवाद में घिर गई है। जेल प्रशासन द्वारा जारी दो विरोधाभासी पत्रों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जेल अधीक्षक ने निलंबित अधिकारियों को चार्ज सौंपने के लिए बेउर जेल बुलाया, वहीं दूसरी तरफ परिसर में आने पर उन्हीं के खिलाफ सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ और अनधिकृत प्रवेश के आरोप में एफआईआर दर्ज करा दी।
आधिकारिक पत्र के बाद बेउर जेल पहुंचे थे निलंबित अधिकारी
मामले की शुरुआत जेल अधीक्षक के उस पत्र से हुई, जिसमें उन्होंने संबंधित मंडल कारा अधीक्षकों से अनुरोध किया था कि निलंबित सहायक अधीक्षक अभिषेक कुमार, मनीष कुमार ठाकुर, शालिनी और कुंदन कुमारी को बेउर जेल भेजा जाए। पत्र में साफ लिखा गया था कि नए अफसरों को अब तक विधिवत चार्ज नहीं मिला है, इसलिए इनकी मौजूदगी में प्रभार हैंडओवर कराया जाए। इसी आदेश का पालन करते हुए अधिकारी बेउर जेल पहुंचे थे।
28 जुलाई 2026 को दर्ज हुई एफआईआर, लगे गंभीर आरोप
इसके तुरंत बाद 28 जुलाई 2026 को जेल अधीक्षक की शिकायत पर बेउर थाने में उपाधीक्षक अजय कुमार समेत अभिषेक कुमार, मनीष कुमार ठाकुर, शालिनी और कुंदन कुमारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। आवेदन में कहा गया कि निलंबन के बावजूद इन अधिकारियों ने बिना अनुमति परिसर में प्रवेश किया और बिहार कारा हस्तक-2012 के नियमों का उल्लंघन करते हुए गोपनीय दस्तावेजों व अभिलेखों से छेड़छाड़ की कोशिश की।
पीड़ित अधिकारियों का दावा: लिखित आदेश पर ही जेल पहुंचे थे हम
एफआईआर में नामजद निलंबित अधिकारियों ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि वे किसी अनधिकृत तरीके से जेल में नहीं घुसे थे, बल्कि उन्हें आधिकारिक पत्र भेजकर प्रभार सौंपने की विभागीय प्रक्रिया के लिए बुलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन ने पहले खुद बुलाया और फिर उसी उपस्थिति को आपराधिक मामला दर्ज करने का आधार बना लिया।
जेल प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
दोनों आधिकारिक दस्तावेज (बुलावे का पत्र और एफआईआर की कॉपी) सामने आने के बाद बेउर जेल प्रशासन की कार्यशैली और आंतरिक कलह पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ही समय में प्रभार के लिए बुलाना और फिर उसी पर कानूनी कार्रवाई करना प्रशासनिक फैसलों को कटघरे में खड़ा करता है। फिलहाल यह मामला पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है, जिसके बाद ही असली सच्चाई सामने आ सकेगी।
धीरज सिंह की रिपोर्ट