भारत सरकार का बड़ा फैसला: प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अलख एन. शर्मा बने 'श्रम सांख्यिकी उच्चस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति' के अध्यक्ष

Patna : भारत सरकार ने देश के प्रख्यात अर्थशास्त्री और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (IHD) के निदेशक प्रो. अलख एन. शर्मा को श्रम सांख्यिकी पर गठित उच्चस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति (High-Level Technical Expert Committee on Labour Statistics) का अध्यक्ष नियुक्त किया है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य, तकनीकी बदलावों, विशेषकर गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म आधारित श्रम के विस्तार तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आगमन के इस दौर में यह समिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस उच्चस्तरीय समिति में देश के प्रमुख श्रम अर्थशास्त्री और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।


श्रम बाज़ार के बदलते ढांचे का आकलन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनात्मक डेटा तैयार करना मुख्य उद्देश्य

मंत्रालय द्वारा गठित इस विशेष समिति के प्रमुख उद्देश्यों में देश के श्रम बाज़ार और रोज़गार संकेतकों को और अधिक सुदृढ़ करना तथा उनकी समय-समय पर गहन समीक्षा करना शामिल है। इसके अलावा, समिति श्रम बाज़ार की बदलती संरचना का सटीक आकलन करेगी, ताकि नीति निर्माताओं को अधिक सूक्ष्म, समयबद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय आंकड़ों (International Comparable Data) की बढ़ती आवश्यकता को पूरा किया जा सके। प्रो. शर्मा के नेतृत्व में यह समिति देश में रोजगार और श्रम से जुड़े आंकड़ों को एक नया और आधुनिक ढांचा प्रदान करेगी।


बिहार से गहरा नाता: ए.एन. सिन्हा संस्थान में लंबे समय तक किया है अध्यापन

मूल रूप से बिहार के रहने वाले प्रो. अलख एन. शर्मा का राज्य के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में बड़ा योगदान रहा है। वे पूर्व में राजधानी पटना स्थित प्रतिष्ठित 'ए.एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान' में कई वर्षों तक अध्यापन कार्य कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के आर्थिक विकास, श्रम गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर व्यापक और व्यावहारिक शोध (Research) किया है, जिसे नीतिगत स्तर पर काफी सराहा गया है।


श्रम अर्थशास्त्र के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्राप्त है विशेष पहचान

प्रो. अलख एन. शर्मा वर्तमान में इंडियन सोसाइटी ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स (ISLE) के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, साथ ही वे प्रतिष्ठित 'इंडियन जर्नल ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स' (IJLE) के संपादक भी हैं। श्रम अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके दशकों पुराने अनुभव, शोध और महत्वपूर्ण योगदान को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। उनकी इस नई नियुक्ति से देश के श्रम सुधारों और रोजगार नीतियों को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।