Bihar News : मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने ममता बनर्जी पर किया तीखा हमला, राष्ट्रपति के अपमान का लगाया आरोप, कहा दलित-आदिवासी समाज नहीं भूलता अपमान

Bihar News : बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया है......पढ़िए आगे

मंत्री का सीएम ममता पर आरोप - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री और 'हम' (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान हुए व्यवहार को केवल प्रोटोकॉल की अनदेखी नहीं, बल्कि पूरे दलित और आदिवासी समाज के सम्मान पर चोट करार दिया है। डॉ. सुमन ने इसे एक संवैधानिक पद की गरिमा को जानबूझकर गिराने की कोशिश बताया है।

स्वागत में अनुपस्थिति पर उठाए सवाल

डॉ. सुमन ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि जब देश की प्रथम नागरिक और आदिवासी समाज की गौरव द्रौपदी मुर्मू बंगाल पहुंचीं, तो राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या उनके मंत्रिमंडल का कोई भी सदस्य उनके स्वागत के लिए उपस्थित नहीं था। उन्होंने इसे शिष्टाचार की भारी कमी बताते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह प्राथमिक दायित्व था कि वे राष्ट्रपति का सम्मानपूर्वक स्वागत करतीं, लेकिन वहां केवल उपेक्षा दिखाई दी।

मंच की गरिमा और संघर्ष की अवहेलना

सिलीगुड़ी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का जिक्र करते हुए डॉ. सुमन ने कहा कि कार्यक्रम के मंच को छोटा करना और राष्ट्रपति को उचित स्थान न देना उस संघर्ष का अपमान है, जिसके दम पर वंचित समाज की एक बेटी देश के सर्वोच्च पद तक पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवहार ममता सरकार की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है, जो एक आदिवासी महिला के बढ़ते कद को पचा नहीं पा रही है।

दलित-आदिवासी समाज में आक्रोश

अपने वक्तव्य में डॉ. सुमन ने चेताया कि आज देश का हर दलित और आदिवासी इस घटनाक्रम को देख रहा है और खुद से सवाल पूछ रहा है कि क्या इस लोकतंत्र में उनके सम्मान का कोई मूल्य है? उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह पीड़ा केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की है जो राष्ट्रपति मुर्मू को अपने स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

इतिहास और स्वाभिमान की चेतावनी

अंत में डॉ. सुमन ने कड़े लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है कि दलित-आदिवासी समाज अपने सम्मान पर लगी चोट को कभी चुपचाप सहन नहीं करता और न ही भूलता है। उन्होंने 'जय जोहार' और 'जय बिरसा' के उद्घोष के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को उनके इस व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहराया।