मोकामा में गंगा में डूबे दो किशोर, मौत के बाद मचा कोहराम, तीन साल से SDRF तैनाती की मांग
मोकामा में हादसे के बाद दरियापुर गांव में मातम पसर गया। दोनों बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों की चीख-पुकार से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।
Bihar News : पटना जिले के मोकामा प्रखंड के दरियापुर गांव में शुक्रवार को गंगा स्नान के दौरान हुए हादसे में दो बच्चों की डूबने से मौत हो गई। दोनों बच्चे काली स्थान घाट पर स्नान करने गए थे। इसी दौरान पैर फिसलने से वे गंगा किनारे बने एक गहरे गड्ढे में चले गए और डूब गए। मृतकों की पहचान 12 वर्षीय मोहम्मद रेहान और 15 वर्षीय मोहम्मद जैद के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे स्नान कर रहे थे, तभी अचानक गहरे पानी में चले गए। मौके पर मौजूद अन्य बच्चों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी।
बच्चों के डूबने की खबर मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद दोनों को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद हाथीदह थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल, बाढ़ भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
दो बच्चों की मौत से गांव में पसरा मातम
हादसे के बाद दरियापुर गांव में मातम पसर गया। दोनों बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों की चीख-पुकार से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।
तीन साल से SDRF की स्थायी तैनाती की मांग
इस हादसे के बाद मोकामा में SDRF की स्थायी तैनाती की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से मोकामा में SDRF की स्थायी टीम तैनात करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में अकेले मोकामा प्रखंड में डूबने से 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक यहां SDRF की स्थायी तैनाती नहीं की गई है।
लगातार हो रही डूबने की घटनाओं और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मोकामा में जल्द से जल्द SDRF की स्थायी तैनाती करने और गंगा घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
रविशंकर की रिपोर्ट