Bihar News : जदयू से निष्कासित छोटू सिंह के समर्थन में आए मोकामा विधायक अनंत सिंह, कहा- एक झोक कोई गलती करता है तो सजा नहीं होता है....

Bihar News : जेडीयू से निष्कासित नेता छोटू सिंह को लेकर मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बड़ा बयान दिया है । छोटू सिंह का समर्थन करते हुए अनंत सिंह ने कहा है कि पार्टी को चाहिए फैसला वापस ले....पढ़िए आगे

छोटू सिंह को मिले माफ़ी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : जनता दल (यूनाइटेड) से निष्कासित नेता अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह के समर्थन में मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह खुल कर सामने आ गए हैं। अनंत सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक बड़ा बयान देते हुए जेडीयू शीर्ष नेतृत्व से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। छोटू सिंह का पुरजोर बचाव करते हुए विधायक ने कहा कि पार्टी को चाहिए कि वह अपने निष्कासन के आदेश को तुरंत वापस ले। उन्होंने दलील दी कि यदि छोटू सिंह से कोई भूल हो भी गई है, तो उसे पहली गलती मानकर माफ कर दिया जाना चाहिए, सीधे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना कहीं से भी उचित नहीं है।

अपने चिरपरिचित बेबाक अंदाज में अनंत सिंह ने वीआईपी संस्कृति पर निशाना साधते हुए कहा कि इस दुनिया में आखिर गलती किससे नहीं होती है। उन्होंने पार्टी के भीतर की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई बड़ा नेता या रसूखदार व्यक्ति बड़ी गलती करता है, तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती और सब कुछ दबा दिया जाता है। लेकिन वहीं जब कोई छोटा कार्यकर्ता या नेता अनजाने में कोई चूक कर बैठता है, तो उसे तुरंत पार्टी से निष्कासित कर दिया जाता है। 

मोकामा विधायक ने कहा कि इंसान कभी-कभी एक झोंक में आकर कोई गलती कर बैठता है, जिसके लिए उसे इतनी बड़ी सजा नहीं मिलनी चाहिए। सजा केवल उसे मिलनी चाहिए जो आदतन बार-बार गलतियां या अपराध दोहराता हो। उन्होंने आगे कहा कि जब न्यायाधीश भी किसी मामले की सुनवाई करते हैं, तो वे अपराधी का ट्रैक रिकॉर्ड देखते हैं। अगर किसी पर पहले से 25 केस दर्ज हैं, तब तो वह वाकई गलत है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति पहली बार किसी एक-आध मामले में फंस जाता है, तो जज साहब भी नरमी बरतते हुए उसे बख्श देते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में जनता दल (यूनाइटेड) ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनहीनता के गंभीर आरोपों में अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इस कार्रवाई से संबंधित आधिकारिक सांगठनिक आदेश प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के हस्ताक्षर से जारी किया गया था। इस कड़ी कार्रवाई के तहत छोटू सिंह को सबसे पहले जदयू के प्रदेश महासचिव के महत्वपूर्ण पद से मुक्त किया गया था, जिसने राजनीतिक गलियारों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

जेडीयू द्वारा की गई इस बड़ी कड़ात्मक कार्रवाई का असर सरकारी स्तर पर भी देखने को मिला था। पार्टी से निष्कासन के तुरंत बाद छोटू सिंह को बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव पद से भी हाथ धोना पड़ा था। मालूम हो कि छोटू सिंह को 23 जून 2025 को ही राज्य नागरिक परिषद का महासचिव मनोनीत किया गया था, लेकिन विवादों के चलते उनका यह कार्यकाल लंबा नहीं चल सका। अब अनंत सिंह के इस बयान के बाद इस निष्कासन मामले ने एक बार फिर नया राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।