Bihar News : दहेज हत्या मामलों में जमानत पर पटना हाईकोर्ट सख्त, कहा-सिर्फ चार्जशीट आधार नहीं, आरोपी पति की बेल किया रद्द, 2 हफ्ते में सरेंडर का दिया आदेश
Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के मामलों में जमानत देने को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा की निचली अदालतों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए.......पढ़िए आगे
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के मामलों में जमानत देने को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसे गंभीर मामलों में अदालतों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। केवल कुछ माह की न्यायिक हिरासत, चार्जशीट दाखिल हो जाना या मुकदमे में समय लगने की संभावना जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने भोजपुर के चांदी थाना कांड में मृतका के पति अजय यादव उर्फ अजय कुमार यादव को सत्र न्यायालय से मिली जमानत रद्द कर दी।
कोर्ट ने आरोपी को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर भोजपुर के एसपी को उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। ये मामला संध्या देवी की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। मृतका की मां ने आरोप लगाया था कि मई 2022 में विवाह के बाद से पति और ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसकी बेटी को प्रताड़ित करते थे।
दरअसल दिसंबर, 2024 में उसकी हत्या कर शव गायब कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली कोर्ट ने अपने आदेश में स्वयं दहेज उत्पीड़न के आरोपों को प्रथमदृष्टया सही माना था, लेकिन इसके बावजूद आरोपी को जमानत दे दी। यह आदेश परस्पर विरोधाभासी होने के साथ न्यायिक विवेक के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दहेज मृत्यु के मामलों में भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 118 के तहत उपलब्ध वैधानिक उपधारणा पर विचार करना आवश्यक है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मृतका का शव बरामद नहीं होना आरोपी के पक्ष में नहीं माना जा सकता, क्योंकि अभियोजन का आरोप ही शव गायब कर साक्ष्य मिटाने का है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि जमानत आदेश प्रासंगिक तथ्यों की अनदेखी कर या कानून के विपरीत आधारों पर पारित किया गया हो,तो उसे हाईकोर्ट निरस्त कर सकता है। साथ ही निचली अदालत को मुकदमे का शीघ्र निष्पादन करने का भी निर्देश दिया है।