Political News: एक हत्या माफ हो तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार दूंगा.... मुकेश सहनी के बयान से मचा सियासी भूचाल

Political News: विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है। ....

मुकेश सहनी के बयान से सियासी भूचाल- फोटो : social Media

Political News:  विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा और विवादित बयान दिया है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या की माफी मिल जाए तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मारेंगे। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि वे संविधान और कानून में विश्वास रखने वाले नागरिक हैं। सहनी का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी बहस तेज है।

सहनी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए एक अखबार का हवाला देते हुए जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। हालांकि ये आरोप सहनी के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

सहनी ने 2029 के आम चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष सत्ता में आता है तो मौजूदा व्यवस्था से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी और ज्ञानेश कुमार जेल जाने वाले पहले लोगों में होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना का दावा किया।वहीं चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट किया कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच आयोग की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, उसके सभी आधिकारिक निर्णयों को कानूनी मान्यता प्राप्त है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इधर, आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने आयोग की आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का बचाव किया है।