Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर अग्निकांड पर सियासी संग्राम, अस्पताल में मौत, मरीज लापता और सरकार पर सवालों की बौछार, विपक्ष ने मांगा जवाब
राजद का कहना है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में नियमों की अनदेखी कर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहे अवैध अस्पताल में आग लग जाने से कई लोग मारे गए अनेक झुलस गए लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी देखिए...
Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड ने न सिर्फ कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कई मरीजों का अब तक अता-पता नहीं चल पाने की खबर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हादसे में अब तक पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य झुलसे हुए मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
आग लगने के बाद अस्पताल परिसर में अफरातफरी और भगदड़ का माहौल बन गया। इसी दौरान करीब एक दर्जन मरीजों के लापता होने की सूचना सामने आई। अपने परिजनों की तलाश में परिवार के लोग शहर के अस्पतालों की खाक छानते नजर आए। जिलाधिकारी और एसएसपी के निर्देश पर पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों को विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भेजा गया, जहां मरीजों की पहचान और खोजबीन का अभियान चलाया गया।
इस त्रासदी पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया है। साथ ही सदर अस्पताल और श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने का दावा किया गया है।
वहीं राजद ने स्वस्थ्य मंत्री पर निशाना साधा है, राजद का कहना है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में नियमों की अनदेखी कर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहे अवैध अस्पताल में आग लग जाने से कई लोग मारे गए अनेक झुलस गए लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी देखिए इस दुखद घटना पर बिना जवाबदेही के हाथ जोड़कर गर्मी में दिल्ली घूमने निकल गए।ना संवेदना व्यक्त की, ना दोषियों पर कार्रवाई की बात और ना ही घटनास्थल का दौरा? क्या ऐसा स्वास्थ्य मंत्री या मंत्री बिहार को चलाएगा? एक मंत्री का शर्मनाक आचरण और व्यवहार!क्या हमारा बिहार ऐसा ही स्वास्थ्य मंत्री डिजर्व करता है
हालांकि इस दर्दनाक हादसे के बाद राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों और सरकार के आलोचकों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और फायर ऑडिट की प्रक्रिया समय पर पूरी होती तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। राजद का आरोप है कि हादसे के बाद सरकार की ओर से अपेक्षित जवाबदेही और सक्रियता दिखाई नहीं दी। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटा है तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुजफ्फरपुर का यह अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े करने वाला मुद्दा बन चुका है। जनता की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस त्रासदी के जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्ट- रंजन कुमार सिंह