NEET छात्रा रेप-मौत कांड में CBI की 5 घंटे की तफ्तीश, मोबाइल बरामद, पोस्टमॉर्टम से पहले रेप नहीं का ऐलान क्यों, रिमांड से बचता रहा कौन? पढ़िए इनसाइड स्टोरी
इंसाफ की दहलीज़ पर सीबीआई! NEET छात्रा रेप-मौत कांड में 5 घंटे की तफ्तीश, मोबाइल बरामद, पुलिस पर उठे संगीन सवाल
NEET Student Death Case: NEET छात्रा कांड में अब जांच की सुई सीधे पुलिसिया कार्रवाई पर टिक गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है आख़िर बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आए पुलिस टीम ने किस बुनियाद पर यह कह दिया कि रेप नहीं हुआ? क्या यह महज़ जल्दबाज़ी थी या फिर किसी को बचाने की कोशिश? यही संगीन सवाल अब सीबीआई ने उठा दिए हैं।
एजेंसी ने यह भी पूछा है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को अब तक रिमांड पर लेकर सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की गई। जब शक की सुई घूम रही थी, तो फिर हिरासत में लेकर सच उगलवाने की कोशिश क्यों नहीं हुई?
तफ्तीश के घेरे में चित्रगुप्त नगर थाना भी है। एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई? क्राइम सीन को सील करने में कितना वक्त लगा? क्या मौके पर मौजूद भीड़ या स्टाफ ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की? ये तमाम सवाल अब पुलिस की पेशानी पर शिकन बनकर उभर रहे हैं।
सीबीआई ने मेडिकल और लामा रिपोर्ट की टाइमिंग पर भी पड़ताल शुरू कर दी है। क्या दोनों रिपोर्ट्स का वक्त आपस में मेल खाता है? अस्पताल से लामा रिपोर्ट कब जब्त की गई? क्या उसे पहले केस डायरी में शामिल किया गया था या बाद में जोड़ा गया? अगर छात्रा की हालत नाज़ुक थी, तो रेफरल में देरी क्यों हुई? और सबसे अहम पुलिस को फौरन सूचना क्यों नहीं दी गई?
इसी कड़ी में सोमवार को चित्रगुप्त नगर थाना में तैनात महिला सब इंस्पेक्टर रीना कुमारी को बुलाकर करीब दो घंटे तक सवालों की बौछार की गई। उनसे पूछा गया कि इस केस के बारे में वे क्या जानती हैं? क्या वे जांच टीम का हिस्सा थीं? अगर थीं, तो किन-किन जगहों पर गईं और उनके सामने कौन से अहम तथ्य आए?
NEET छात्रा रेप-मौत मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए मैदान में उतरी सीबीआई को चार दिन हो चुके हैं, और जांच का शिकंजा अब कसता जा रहा है। जहानाबाद के शंभू गर्ल्स हॉस्टल से लेकर पीड़िता के घर तक एजेंसी ने तहकीकात की परतें उधेड़नी शुरू कर दी हैं।
सीबीआई टीम 48 घंटे में दूसरी बार छात्रा के घर पहुंची और भाई से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। मोबाइल फोन की मांग की गई तो पता चला कि वह मखदुमपुर में रिपेयरिंग के लिए दिया गया है। टीम तत्काल वहां पहुंची, दुकान बंद मिली, लेकिन मोबाइल बगल की पान दुकान से बरामद कर लिया गया। अब उस मोबाइल का डिजिटल पोस्टमार्टम शुरू हो चुका है।
सीबीआई ने माता-पिता से भी तल्ख सवाल किए क्या आप पर बयान बदलने या केस वापस लेने का दबाव बनाया गया? किसने? परिवार ने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच में पुलिस और एसआईटी आत्महत्या का एंगल गढ़ने में लगी थीं। बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के रेप न होने की बात किस बुनियाद पर कही गई? एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई? क्राइम सीन को सील करने में कितना वक्त लगा?
पिता ने बयान दिया कि बेटी पढ़ाई के दबाव और कमजोरी की शिकायत करती थी, मगर आत्महत्या जैसा कदम उठाने वाली नहीं थी। अस्पताल में उसकी हालत, कपड़ों की स्थिति और जिस्म पर जख्मों ने उन्हें यकीन दिलाया कि “कुछ संगीन वारदात” हुई है। बाद में पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट ने रेप की तस्दीक की, मगर पुलिस मानने को तैयार नहीं थी।
अब सीबीआई एक-एक पुलिस अधिकारी से अलग-अलग पूछताछ कर रही है। यह सिलसिला जारी रहेगा। इंसाफ़ की राह लंबी जरूर है, मगर एजेंसी के तेवर साफ हैं हर लूपहोल, हर लापरवाही और हर संदिग्ध किरदार को बेनकाब किया जाएगा।