NEET student death: इंसाफ की तलाश में नीट छात्रा की मौत का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, पिता की याचिका में डीजीपी, एसपी, थानाप्रभारी से लेकर से डॉक्टर सतीष तक के नाम

नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है,याचिका में डीजीपी, पटना के एसपी, चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रौशनी कुमारी समेत कई आला अफ़सरों को प्रतिवादी बनाया गया है। ...

इंसाफ की तलाश में नीट छात्रा की मौत का मामला पहुंचा हाईकोर्ट- फोटो : reporter

NEET student death:  पटना की सियासी और अदालती फिज़ा एक बार फिर गर्म है। नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत ने न सिर्फ़ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि हुकूमत, पुलिस और सिस्टम की नीयत पर भी उंगलियां उठा दी हैं। इस पूरे मामले में मृत छात्रा के पिता ने इंसाफ़ की तलाश में पटना हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उनकी ओर से एक आपराधिक रिट याचिका दाख़िल की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई की गुहार जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ से लगाई गई।

अदालत ने इस अर्ज़ी को गंभीरता से लेते हुए केस को सूचीबद्ध करने का निर्देश दे दिया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई होगी। यह महज़ एक पिता की फ़रियाद नहीं, बल्कि उस शिक्षा-पसंद पीढ़ी की चीख़ है जो बड़े शहरों के हॉस्टलों में अपने ख़्वाबों के साथ रह रही है।

याचिका में गृह विभाग के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, डीजीपी, पटना के एसपी, चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रौशनी कुमारी समेत कई आला अफ़सरों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके साथ ही शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक श्रवण अग्रवाल, नीलम अग्रवाल, आंसू अग्रवाल, वार्डन चंचला और मकान मालिक मनीष कुमार के नाम भी शामिल हैं। इलाज से जुड़े डॉ. प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल, डॉ. सतीश, जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और सहज सर्जरी को भी कटघरे में खड़ा किया गया है।

इसी मामलें में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित भी दायर की गयी।ये जनहित याचिका सुषमा कुमारी की ओर से उनकी अधिवक्ता अलका वर्मा ने दायर की है।इस जनहित याचिका में  नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई।पुलिस द्वारा जो जाँच की जा रही है,वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है।

इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी।इसलिए पटना हाईकोर्ट में ये जनहित याचिका में मांग की गयी विभिन्न हॉस्टलों के सुरक्षा व्यवस्था,विशेष कर महिला होस्टलों की सुरक्षा,वहां के क्रियकलापों और उनके लिए बने प्रावधानों को सख्ती से हाईकोर्ट लागू कराये।

साथ ही इस मामलें की जाँच की निगरानी हाईकोर्ट द्वारा की जाये।इसलिए हाईकोर्ट के प्रभावी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। 

बता दें कि मृत छात्रा जहानाबाद की रहने वाली थी। 5जनवरी, 2026 को हॉस्टल में  आयी।6 जनवरी,2026 को उसे बेहोश पाया गया।फिर उसे एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसकी मौत 11जनवरी,2026 को हो गयी।पुलिस ने तो पहले नींद की ओवरडोज दवा लेने का मामला माना । मृत छात्रा 5 जनवरी 2026 को पटना के हॉस्टल में आई थी। 6 जनवरी को वह बेहोशी की हालत में पाई गई, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस ने इसे नींद की दवा की ओवरडोज़ बताया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद बलात्कार और ज़ोर-जबरदस्ती के एंगल से जांच शुरू हुई। अफ़सोस की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पाया।

लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इसे बलात्कार और जोर जबरदस्ती के एंगल से पुलिस ने जाँच शुरु किया,लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया ।इसी बीच इस मामले ने जनहित का रूप भी ले लिया है। सुषमा कुमारी की ओर से अधिवक्ता अलका वर्मा ने पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाख़िल की है। इस याचिका में कहा गया है कि छात्रा की मौत संदिग्ध हालात में हुई, लेकिन पुलिस जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। इससे भ्रम और अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई है।

जनहित याचिका में मांग की गई है कि महिला हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था, वहां के क्रियाकलाप और बनाए गए नियम-कायदों को हाईकोर्ट सख़्ती से लागू कराए। साथ ही इस पूरे मामले की जांच की निगरानी अदालत स्वयं करे, ताकि इंसाफ़ पर से धूल हट सके।