नीट छात्रा के अंतःवस्त्रों में मिले 'वीर्य' के निशान, मोबाइल पर सर्च किया था 'साइनाइड''! घटना कहां हुआ, जवाब देने से बचते दिखे आईजी

पटना पुलिस ने नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिसमें फॉरेंसिक जांच में छात्रा के कपड़ों पर मिले साक्ष्यों और उसकी इंटरनेट सर्च हिस्ट्री ने इस पूरी गुत्थी को और उलझा दिया है।

Patna - पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदेहास्पद मौत के मामले में पटना पुलिस ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिससे इस पूरी घटना ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने अब इसकी जांच का जिम्मा सीबीआई (CBI) को सौंप दिया है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पीड़िता के परिजनों की ओर से मामले को दबाने और प्राथमिकी दर्ज न कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया।

CCTV फुटेज और हॉस्टल की गतिविधियां

एसएसपी पटना कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि हॉस्टल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को विस्तृत जांच के लिए विशेष लैब भेजा गया था, जहाँ से पुष्टि हुई है कि फुटेज के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। फुटेज के अनुसार, छात्रा 5 तारीख को अपनी एक सहेली के साथ हॉस्टल पहुंची थी। उस रात वह केवल दो बार, दो-दो मिनट के लिए अपने कमरे से बाहर निकली थी और उसके बाद वह कमरे के अंदर ही रही। अगले दिन सुबह जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला, तो वार्डन और अन्य छात्राओं की मौजूदगी में गार्ड ने कमरे का दरवाजा तोड़ा था।

जहानाबाद से पटना तक का सफर और दवा की खरीद

पुलिस की तकनीकी और वैज्ञानिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि छात्रा 27 दिसंबर से 5 जनवरी तक जहानाबाद स्थित अपने घर पर ही थी। पटना वापस आने के दौरान, उसने जहानाबाद के अरवल मोड़ स्थित एक मेडिकल स्टोर से 'एमिटोन प्लस' (Amitone Plus) नामक दवा खरीदी थी। इस खरीद की पुष्टि पीड़िता के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, दुकानदार के बयान और परिजनों के शुरुआती बयानों से भी हुई है।

मेडिकल रिपोर्ट और दुष्कर्म की आशंका

छात्रा का इलाज 6 से 10 जनवरी तक प्रभात मेमोरियल अस्पताल में चला, जहाँ उसकी स्थिति गंभीर बनी रही। अस्पताल की शुरुआती रिपोर्ट में मौत का कारण 'नशे का ओवरडोज' बताया गया था। हालांकि, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जांच में छात्रा के अंतःवस्त्रों पर वीर्य के अंश (Semen) पाए गए हैं, जिसने मामले में यौन हिंसा की ओर इशारा किया है। इसी आधार पर अब एसआईटी (SIT) और सीबीआई की टीम संभावित संदिग्धों का डीएनए (DNA) प्रोफाइलिंग करा रही है।

डायरी में दर्ज मानसिक स्थिति और मोबाइल सर्च हिस्ट्री

जांच दल को छात्रा के कमरे से एक निजी डायरी और उसका मोबाइल फोन भी मिला है। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि छात्रा ने 24 दिसंबर को इंटरनेट पर 'साइनाइड' (Cyanide) और 'नींद की गोलियों' (Sleeping pills) के बारे में सर्च किया था। उसकी डायरी के विश्लेषण से पुलिस को उसकी मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत संघर्षों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिसे अब सीबीआई अपनी जांच का मुख्य आधार बना रही है।

पुलिसिया लापरवाही पर सख्त एक्शन

इस संवेदनशील मामले में सूचना देने में देरी और कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एसएसपी के आदेश पर कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष और चित्रगुप्त नगर के थानेदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस का मानना है कि यदि समय पर सही जानकारी दी गई होती, तो साक्ष्यों को और अधिक मजबूती से सुरक्षित रखा जा सकता था।

मीडिया के लिए पोक्सो (POCSO) एक्ट की हिदायत

पटना आईजी जितेंद्र राणा और एसएसपी ने सभी मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया पोर्टल्स को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने निर्देश दिया है कि यह मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए पोक्सो एक्ट के तहत पीड़िता की पहचान, उसका फोटो या उसके परिजनों से संबंधित ऐसी कोई भी जानकारी साझा न की जाए जिससे उनकी पहचान सार्वजनिक हो। पुलिस ने कहा है कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना कहां हुई, जवाब देने से बचे आईजी

इस दौरान मीडिया ने छात्रा के साथ घटना कहां हुई, इसको लेकर जानकारी मांगी। जिसको लेकर आईजी सवालों से बचते नजर आए। वहीं इसके बाद आईजी प्रेस कांफ्रेंस  को अधूरा छोड़कर चले गए।


रिपोर्ट-  अनिल कुमार